मॉडल अस्पताल में बत्ती गुल, मोबाइल रोशनी में इलाज

मॉडल अस्पताल में बत्ती गुल, मोबाइल रोशनी में इलाज
जेनरेटर-इनवर्टर फेल, आधे घंटे तक अंधेरे में ब्लड प्रेशर जांच व लगायी गयी सूई, सहम गये मरीज व परिजन मधेपुरा. सदर अस्पताल परिसर स्थित अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडल अस्पताल में सोमवार की देर शाम स्वास्थ्य व्यवस्था की कलई खुल गयी. बिजली गुल हो गयी और पूरा अस्पताल परिसर अंधेरे में डूब गया. हालत यह रही कि न तो जेनरेटर चला और न ही इनवर्टर की रोशनी जली. मजबूरी में डॉक्टर व नर्स मोबाइल का फ्लैशलाइट जलाकर इलाज करने लगे. करीब आधे घंटे तक मरीजों का ब्लड प्रेशर चेक करने से लेकर सूई लगाने की प्रक्रिया मोबाइल रोशनी में होती रही. मरीज व उनके परिजन सहमकर इधर-उधर भागते दिखे. मरीजों ने जतायी नाराजगी परिजन कुमुद देवी ने कहा कि मेरे बेटे को सूई देने के दौरान अंधेरे में मोबाइल जलाया गया. जरा सी गलती जानलेवा साबित हो सकती थी. स्थानीय निवासी मनोज कुमार ने कहा कि मॉडल अस्पताल बनाकर भी मरीजों को मोबाइल की रोशनी में इलाज कराना पड़ रहा है, यह प्रशासन की नाकामी है. जिम्मेदारी से बचा प्रबंधन अस्पताल कर्मियों ने तकनीकी गड़बड़ी का हवाला देकर कहा कि जेनरेटर स्टार्ट नहीं हो सका और इनवर्टर की बैटरी डाउन थी. हालांकि प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी गयी. विशेषज्ञ की राय अस्पताल में पावर बैकअप हर हाल में चालू रहना चाहिए. यह सीधी मरीजों की जान से खिलवाड़ है. जिम्मेदारी तय करनी होगी. डॉ कुंदन सुमन —- मॉडल अस्पताल का हाल करीब 37 करोड़ की लागत से बनी इमारत. दावे : अत्याधुनिक उपकरण, पर्याप्त पावर बैकअप. उद्देश्य : ग्रामीण-शहरी मरीजों को बेहतर सुविधा. हकीकत : बिजली गुल होते ही अंधेरे में इलाज.
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