भादो माह में आमतौर पर बारिश की अच्छी उम्मीद, पर खेतों में पड़ने लगी दरारें, किसान चिंतित

बारिश कम होने एवं धूप तेज से पौधे सूख रहे है कि किसानों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो अगले एक पखवाड़े में फसल पूरी तरह नष्ट हो सकती है.
ग्वालपाड़ा भादव महीना के अंत में मौसम की बेरुखी और तेज धूप के कारण बढ़ती गर्मी में आम जन जीवन को ही नहीं, बल्कि कृषि व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया है. सबसे अधिक प्रभाव धान की खेती पर पड़ा है. इससे खेतों की नमी खत्म होने से दरारें पड़ने लगी है और फसल सूखने लगी है. भादों के महीने में आमतौर पर बारिश की अच्छी उम्मीद रहती है, इससे धान की फसल को जीवनदायनी पानी मिलता है, लेकिन इस बार स्थिति उलटा है. बारिश कम होने एवं धूप तेज से पौधे सूख रहे है कि किसानों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो अगले एक पखवाड़े में फसल पूरी तरह नष्ट हो सकती है. स्थानीय किसान रामू दास, मोहित दास, नागौ मुखिया, संजय सिंह ने लक्षण तांती, महेंद्र पासवान, बुदुर सिंह, नुनु झा, संतोष झा, रामलखन यादव, रंजन यादव, पिंकू यादव आदि ने बताया कि खेतों की हालत देखकर किसानों का मन टूटने लगा है. पौधों के पत्ते मुरझा रहे हैं और दादरारें फटने लगी है. फसल में इस समय पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, लेकिन आसमान से एक बूंद भी नहीं गिर रही है. किसान अपनी फसल को बचाने के लिए महंगे दर पर निजी पंप सेट से धान फसल में पानी पटवन कर रहे हैं, लेकिन कहावत है कि ” धान पान नित स्नान “ऐसी स्थिति में पंप सेट से पानी पटवन उंट के मुंह में जीरा का फोरन साबित हो रहा है. बहरहाल जो हो किसान किसान अपनी किसानी से चिंतित है.
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