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चार दिनों से सदर अस्पताल का ओपीडी है बंद, मरीजों को परेशानी

Updated at : 30 Mar 2025 6:15 PM (IST)
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चार दिनों से सदर अस्पताल का ओपीडी है बंद, मरीजों को परेशानी

नीतिगत निर्णय के खिलाफ डॉक्टरों ने ओपीडी का बहिष्कार करने का कदम उठाया है.

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मधेपुरा.

सदर अस्पताल के ओपीडी बंद रहने के कारण पिछले चार दिनों से इमरजेंसी में मरीजों की संख्या बढ़ गया है. यह स्थिति इमरजेंसी तैनात डॉक्टरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और मरीजों को भी परेशानी हो रही है. अस्पताल में ओपीडी सेवाएं ठप रहने के कारण कई मरीज प्राइवेट अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हो गए हैं, जो उन्हें आर्थिक रूप से काफी नुकसान पहुंचा रहा है.

बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के चिकित्सकों ने 29 मार्च तक सभी सरकारी अस्पतालों के ओपीडी सेवाओं का ठप करने का निर्णय लिया था. इसके पीछे का मुख्य कारण स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत को पूर्व में भेजा गया पत्र है जिसमें चिकित्सकों ने अपनी समस्याएं बताई थी. जिला भासा के अध्यक्ष डॉ महेस सिंह ने बताया कि शिवहर, गोपालगंज व मधुबनी जिलों के डीएम ने बायोमेट्रिक उपस्थिति के आधार पर डॉक्टर का वेतन रोक दिया है. इसकी विरोध में डॉक्टरों ने ओपीडी का बहिष्कार किया. इससे डॉक्टरों में असंतोष बढ़ा है. इस नीतिगत निर्णय के खिलाफ डॉक्टरों ने ओपीडी का बहिष्कार करने का कदम उठाया है. डॉक्टरों की मांग है कि उनकी सुरक्षा, आवास, और पर्याप्त मानव बल की व्यवस्था में सुधार किया जाए. साथ ही, इमरजेंसी में काम करने वाले डॉक्टरों की बायोमेट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए जाने की आवश्यकता जताई जा रही है. इसके बावजूद, संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मुद्दे पर सकारात्मक पहल नहीं हुई है, जिसके चलते यह स्थिति उत्पन्न हुई है.

– मरीजों को हो रही परेशानी –

अस्पताल में ओपीडी के बंद होने से औसत मरीजों को प्रति दिन मिलने वाले सेवाओं में भारी कमी आई है. ओपीडी में इलाज हेतु आने वाले रोगी अब इमरजेंसी में भीड़ जमा कर रहे हैं, जिससे स्थिति और भी जटिल हो गई है.इस परिस्थिति के कारण मरीजों को असाधारण लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है, और उनकी सामान्य उपचार संबंधी सेवाओं में अनावश्यक देरी हो रही है. इससे न केवल मरीजों की सेहत प्रभावित हो रही है, बल्कि उन्हें मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ रहा है. इस बीच, कई मरीज प्राइवेट अस्पतालों का रुख कर रहे हैं. यह स्थिति आर्थिक दृष्टि से तो नुकसानदेह है ही, मरीजों को मानसिक रूप से भी अवसादित कर रही है. बहुत से लोग अपने जीवन में पहली बार प्राइवेट अस्पतालों के खर्चे का सामना कर रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. यह एक विचारणीय स्थिति है, क्योंकि इलाज के लिए हर किसीके पास एक समान साधन नहीं होते और प्राइवेट अस्पतालों की फीस हमेशा सरकारी अस्पतालों के मुकाबले कई गुना अधिक होती है.

– सख्त नीतियों का विरोध करते हुये ओपीडी के बहिष्कार का लिया फैसला-

अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों ने सख्त नीतियों का विरोध करते हुये ओपीडी के बहिष्कार का फैसला किया है. डॉक्टरों का कहना है कि यदि उन्हें उचित वेतन और सुरक्षा नहीं मिलेगी, तो वे मरीजों की बेहतर सेवा नहीं कर पाएंगे.इस प्रकार, यह पूरी व्यवस्था मरीजों और डॉक्टरों दोनों के लिए एक दुविधा का विषय बन गई है. यदि शीघ्र ही कोई समाधान नहीं निकलता है, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है. मधेपुरा सदर अस्पताल में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, सरकार को शीघ्र इस मुद्दे का समाधान किया जाना चाहिये. डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग के बीच संवाद स्थापित कर समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिये. वहीं, मरीजों के स्वास्थ्य और उनकी सेवा को प्राथमिकता दी जानी चाहिये. यह स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की जिम्मेदारी है कि वे सर्वश्रेष्ठ सेवा सुनिश्चित करें, जो वर्तमान में हताशा और असंतोष का स्रोत बन चुकी है.

– स्वास्थ्य सेवाओं का समुचित प्रबंधन ही लक्ष्य की प्राप्ति में है सहायक-

संघ के सदस्यों ने भी इस बात पर ध्यान देने का आग्रह किया है कि यदि बायोमेट्रिक उपस्थिति में सुधार नहीं किया जाता, तो इससे ना केवल डॉक्टरों का वेतन प्रभावित होगा, बल्कि इससे मरीजों के उपचार में भी बाधा आएगी. स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों में सुधार लाने के लिए ठोस उपायों की आवश्यकता है. आगे बढ़ते हुए, सभी पक्षों को मिलकर एक सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए प्रयास करने की आवश्यकता है. डॉक्टरों को उनकी आवश्यकताएं सुनकर प्रतिक्रिया दी जानी चाहिए, ताकि वे अपनी सेवाओं में और सुधार कर सकें. इसके साथ ही, मरीजों को भी उचित उपचार और सेवाएं मिलनी चाहिये. यह अस्पताल की प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि वे स्थिति को नियंत्रित करें, ताकि मरीजों को जरूरत की सेवाएं समय पर मिल सकें. अति आवश्यक है कि इस संकट का समाधान शीघ्र किया जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवा में सुधार हो सके और अस्पताल की कार्यप्रणाली सामान्य हो सके. समाज में हर एक व्यक्ति की सेहत और कल्याण प्राथमिकता होनी चाहिए, और स्वास्थ्य सेवाओं का समुचित प्रबंधन ही इस लक्ष्य की प्राप्ति में सहायक होगा. भासा के अध्यक्ष महेस सिंह ने बताया कि हमलोगों का बहिष्कार शनिवार को समाप्त किया गया. अब तक सरकार की ओर से किसी तरह की पहल नहीं की गयी है. जल्द इस ओर पहल नहीं होने पर संघ आगे आंदोलन तेज करेगी.

– वर्जन –

जो ओपीडी में मरीज आते है उनका सदर अस्पताल के इमरजेंसी में उपचार किया जा रहा है. सोमवार को ईद रहने के कारण मंगलवार से ओपीडी में उपचार किया जायेगा.

डॉ मिथिलेश ठाकुर, सिविल सर्जन, सदर अस्पताल, मधेपुरा.B

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Kumar Ashish

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By Kumar Ashish

Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

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