ePaper

सदर अस्पताल खुद बना आमजन की जान का दुश्मन

Updated at : 20 Nov 2025 6:35 PM (IST)
विज्ञापन
सदर अस्पताल खुद बना आमजन की जान का दुश्मन

सदर अस्पताल खुद बना आमजन की जान का दुश्मन

विज्ञापन

मधेपुरा. बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए भले ही सदर अस्पताल को मॉडल अस्पताल का दर्जा दे दिया गया हो. नया भवन हद तक बनकर चालू भी हो चुका है, लेकिन जमीनी वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग तस्वीर दिखा रही है. अस्पताल परिसर के बाहर बायोमेडिकल कचरे का ढेर लगा हुआ है, जिससे संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ गया है. अस्पताल के ठीक नजदीक अपशिष्ट पदार्थों का जमावड़ा है, जिसे पशु विचरण कर रहे हैं. ऐसे में पशुओं के बीमार पड़ने का जोखिम भी बना रहता है. वहीं इलाज कराने आने वाले मरीज और उनके परिजन इस आशंका में रहते हैं कि कहीं पुरानी बीमारी के साथ कोई नई बीमारी न लग जाए. जिस रास्ते से स्वस्थ व्यक्ति भी गुजर जाए तो वह भी बीमार पड़ सकता है. इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन इन गंभीर समस्याओं से बेखबर नजर आता है. प्रतिमाह सफाई पर लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है. ऑक्सीजन प्लांट के आसपास भी मेडिकल वेस्ट बिखरा पड़ा है, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ गया है. साफ-सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति सदर अस्पताल में सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे है. पुराने बिल्डिंग के पास बायोमेडिकल वेस्टेज और सामान्य कचरा जमा है. अस्पताल के चारों ओर कचरे का अंबार लगा है. जिसकी वजह से मरीजों के परिजन दिन में भी मच्छरों से परेशान रहते हैं. इससे मलेरिया और अन्य बीमारियों का खतरा बना रहता है. अस्पताल कर्मियों से कई बार शिकायत भी की गयी. नगर परिषद को प्रतिदिन कचरा उठाव की जिम्मेदारी दी गयी है, लेकिन उचित सफाई के बिना ही संबंधित एजेंसियां मोटी कमाई कर रही हैं. स्थिति ऐसी हो चुकी है कि यहां आने वाला स्वस्थ व्यक्ति भी बीमार पड़ जाए. गंदगी से कई तरह के बीमारी फैलने का खतरा बायोमेडिकल कचरे के सही निस्तारण के लिए चार रंग के बॉक्स लगाये जाने का प्रावधान है. अस्पताल में बॉक्स मौजूद भी हैं, लेकिन बाहर ऑक्सीजन प्लांट के पास कचरा खुले में फेंका जा रहा है. कई जगह आग भी लगायी जा रही है. इससे मरीजों, परिजनों और आसपास के लोगों को गंभीर संक्रमण का खतरा बना हुआ है. आवारा पशु और नशे की प्रवृत्ति वाले युवक यहां फेंकी गई सिरिंज का उपयोग करते हैं, जिससे एड्स और अन्य खतरनाक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ऑपरेशन थिएटर का अपशिष्ट, दवाइयां, गंदे कपड़े और अन्य मेडिकल वेस्ट खुले में फेंके जा रहे हैं. यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि बड़े संक्रमण का कारण भी बन सकता है. केमिकल कचरे से घातक बीमारी की आशंका केमिकल युक्त मेडिकल कचरा खुले में जलाया जा रहा है, जिससे जहरीला धुआं फैलता है और सांस व फेफड़े संबंधी रोग होने का खतरा बढ़ जाता है. ऑक्सीजन प्लांट के पीछे यह कचरा अक्सर जलाया जाता है. इससे मरीजों का दम घुटने लगता है. अस्पताल में रोजाना निकलने वाले बायोवेस्ट के निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं है. कई बार कचरे को बड़े गड्ढे में फेंक दिया जाता है, जिससे भयानक दुर्गंध उठती है. यह गंभीर बीमारियों को जन्म देती है. महिला वार्ड से निकलने वाले गंदे कपड़ों के कारण भी नवजात और अन्य मरीजों की सेहत पर असर पड़ता है. अस्पताल परिसर बना संक्रमण का अड्डा बायोवेस्ट को खुले में फेंकने से पछुआ हवा के साथ यह दुर्गंध और धुआं कई बार पूरे अस्पताल में भर जाता है. ऑक्सीजन प्लांट के पीछे देसी शराब और कोरेक्स का जमावड़ा भी हालात को और खराब कर रहा है. स्थिति चिंताजनक है और तत्काल प्रभाव से बायोमेडिकल कचरे के सुरक्षित निस्तारण की आवश्यकता है. अन्यथा सदर अस्पताल आमजन की सेहत का दुश्मन बना रहेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Kumar Ashish

लेखक के बारे में

By Kumar Ashish

Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन