भगवान धन-दौलत के नहीं, सच्चे प्रेम व भाव के हैं भूखे: कृपाशंकर

भगवान धन-दौलत के नहीं, सच्चे प्रेम व भाव के हैं भूखे: कृपाशंकर
आलमनगर. प्रखंड के एनकेएम उच्च विद्यालय मैदान परिसर में आयोजित रामनवमी महोत्सव में राम कथा के दौरान भगवान श्रीराम के वन गमन वनवास केवट प्रसंग और सीता-राम की मार्मिक विदाई का वर्णन किया गया. कथावाचक आचार्य कृपाशंकर जी महाराज ने कहा कि राम जी की कथा में प्रत्येक रिश्ते की ओर से त्याग, धर्मनिष्ठा व भक्ति का उदाहरण प्रस्तुत किया गया. रामचरितमानस त्याग प्रेम और भक्ति रस से परिपूर्ण है, जो श्रोताओं पाठकों और वक्ताओं के मन में आत्मिक शांति और भक्ति की भावना जगाती है. कथा प्रसंग में प्रभु राम और केवट के संवाद सुनकर श्रोता भावविभोर हो उठे केवट का राम के प्रति प्रेम और निश्छल भक्ति प्रेरणादायक है. कथावाचक आचार्य कृपाशंकर जी महाराज ने गंगा किनारे राम और केवट के बीच हुए संवाद की व्याख्या करते हुए महाराज ने बताया कि केवट ने अपनी चतुराई और निश्छल भक्ति से भगवान को प्रेम के बंधन में बांध लिया. केवट का यह हठ कि बिना चरण धोए पार नहीं उतारूंगा. यह सिद्ध करता है कि भगवान धन-दौलत के नहीं, बल्कि केवल सच्चे प्रेम और भाव के भूखे हैं. कथा के दौरान जब महाराज ने अपनी मधुर आवाज में केवट प्रसंग के भजन सुनाए, तो पूरा परिसर जय श्री राम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा. वहीं कथा वाचक ने कहा कि श्रोताओं को प्रसंगों के माध्यम से जीवन में आदर्शों और मर्यादाओं के महत्व को समझाना चाहिए. मौके पर आयोजन समिति के पदाधिकारी अध्यक्ष राजेश्वर राय, कोषाध्यक्ष चंद्रशेखर चौधरी, सचिव उमेश सुरेखा, विकास सिंह, धीरज सिंह, रोहित सिंह, गोलू कुमार, अनमोल कुमार आदि सक्रिय रहे.
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