ठंड व कनकनी से जनजीवन अस्त-व्यस्त, अलाव की समुचित व्यवस्था नहीं
Updated at : 08 Jan 2026 6:55 PM (IST)
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ठंड व कनकनी से जनजीवन अस्त-व्यस्त, अलाव की समुचित व्यवस्था नहीं
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मधेपुरा.
शहर में बढ़ती ठंड व कनकनी ने लोगों के जीवन को कठिन बना दिया है. लगातार गिर रहे तापमान के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. सुबह-सवेरे व देर शाम ठंडी हवाओं के कारण लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं. खासकर गरीब, बुजुर्ग, असहाय व दैनिक मजदूर जैसे वंचित वर्ग को इस समस्या का सबसे अधिक सामना करना पड़ रहा है. शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक तापमान में गिरावट जारी है, लेकिन प्रशासन की ओर से इस ठंड से निपटने के लिए आवश्यक व्यवस्था नहीं की गयी है. सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि कई चौक-चौराहों व भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अलाव का प्रबंध तो किया गया है, कहीं-कहीं अलाव जल रहे हैं भी तो वे पर्याप्त नहीं हैं, इससे लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है. इस समस्या का सबसे ज्यादा असर उन मजदूरों, रिक्शा चालकों, सब्जी विक्रेताओं व राहगीरों पर पड़ रहा है, जो सुबह-सुबह काम पर निकलते हैं. इन सभी को ठंड से बचाव के लिए आग का सहारा लेना पड़ रहा है, लेकिन पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण उनकी परेशानी और बढ़ रही है.स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल ठंड को देखते हुए प्रशासन अलाव की व्यवस्था करता है, ताकि लोगों को राहत मिल सके, लेकिन इस बार स्थिति अलग ही नजर आ रही है. अभी तक पर्याप्त संख्या में अलाव की व्यवस्था नहीं की गयी है. लोग नगर प्रशासन से आग्रह कर रहे हैं कि प्रमुख स्थानों पर तुरंत ही अलाव की संख्या बढ़ायी जाय व जरूरतमंदों को ठंड से राहत पहुंचायी जाय. यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाये गये, तो ठंड से जुड़ी बीमारियों का खतरा और अधिक बढ़ने की आशंका जतायी जा रही है. बुजुर्ग, बच्चे व असहाय लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि उनके लिए ठंड का सामना करना बहुत कठिन हो रहा है.प्रशासन को चाहिये कि वे इस समस्या को गंभीरता से लेते हुये तत्काल प्रभाव से ठंड से बचाव के इंतजाम सुनिश्चित करें. विशेष रूप से प्रमुख चौराहों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन व बाजारों में पर्याप्त संख्या में अलाव जलवाए जायें. साथ ही, गरीब और वंचित वर्ग के लिए गर्म वस्त्र का भी प्रबंध किया जाना चाहिये.
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