मधेपुरा. उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय नेहालपट्टी परिसर में जसम, इंकालबी नौजवान सभा एवं आइसा द्वारा शहीद दिवस मनाया गया. इंकलाबी नौजवान सभा के जिला संयोजक कृष्ण कुमार ने कहा कि भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु को लाहौर जेल में फांसी के 94 साल हो चुके हैं. उन्हें तय समय से एक दिन पहले ही फांसी दे दी गई थी, तब से उन्हें शहीद-ए-आजम के नाम से जाना जाता है. आइसा के जिला सचिव पावेल कुमार ने कहा कि भगत सिंह सिर्फ जोश से भरे हुए क्रांतिकारी युवा नहीं थे, बल्कि वह औपनिवेशिक भारत के सबसे परिपक्व एवं दूरदर्शी विचारकों में से एक थे. उनका और उनके साथियों का बलिदान सिर्फ औपनिवेशिक गुलामी से मुक्त होने की जोशीली चाह तक सीमित नहीं था, बल्कि वह एक समाजवादी भारत का सपना लेकर चले थे. भारत का स्वतंत्रता संग्राम केवल विदेशी हुकूमत से आजादी की लड़ाई नहीं था, बल्कि यह एक महान राष्ट्रीय जागरण भी था. इसने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने एवं आजाद होने के लिए करोड़ों भारतीयों को एकजुट किया. साथ ही आधुनिक भारत की परिकल्पना को भी आकार दिया. जसम के जिलाध्यक्ष राजकिशोर कुमार ने कहा कि हम भगत सिंह को उनके दूरदर्शी नजरिये के लिए भी याद करते हैं, जिसमें उन्होंने चेताया था कि आजादी सिर्फ शासकों को बदलने की लड़ाई नहीं है. ऐसा न हो कि अंग्रेजों की जगह उनके देसी उत्तराधिकारी आ जाये. आइसा जिला सह सचिव श्याम कुमार एवं राजीव कुमार ने कहा कि साफ तौर पर भगत सिंह न केवल ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की बेड़ियों से आजादी की तात्कालिक लड़ाई के लिए भारत को तैयार कर रहे थे, बल्कि वह एक ऐसे संघर्ष की बुनियाद भी रख रहे थे, जहां साम्राज्यवादी वर्चस्व बना रह सकता था व भारत के भावी शासक भी समझौता कर सकते थे या घुटने टेक सकते थे. मार्क्सवादी चिंतक आध्यानंद यादव ने कहा कि आज भगत सिंह को याद करने का वक्त है. जब ट्रंप प्रशासन भारत का हर ओर से अपमान कर रहा है व उसके हितों को चोट पहुंचा रहा है और मोदी सरकार इसे जायज ठहरा रही है. मौके पर अमितेश कुमार, शिवेंद्र कुमार, राजू कुमार, रणवीर कुमार, सोनू कुमार, नीरज कुमार, मनीष कुमार, मधुसूदन कुमार, अजय कुमार, प्रशांत कुमार, छोटू कुमार, कन्हैया कुमार, गोलू कुमार, गौरव कुमार, प्रशांत कुमार, सुधीर कुमार यादव, मिथिलेश कुमार समेत अन्य मौजूद थे.
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