बिहार में बापू '''' संवाद टीम का स्वागत, प्रयास की सराहना
Updated at : 07 Sep 2025 6:22 PM (IST)
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लग-अलग हिस्सों में स्वतंत्रता आंदोलन के दिनों में बापू से जुड़ी यादों को समेटने, संग्रहित करने का बड़ा माध्यम साबित होगा.
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बिहार में बापू ”” पर संवाद का कारवां भूले बिसरे यादों को एकत्रित करने का प्रयास-
मधेपुरा.
””बिहार में बापू”” संवाद की टीम को मधेपुरा पहुंचने पर विभिन्न स्तरों पर सम्मानित किया गया. इस क्रम में आजाद पुस्तकालय के सचिव डॉ हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने मुख्य अतिथि सह मुख्य वक्ता महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र) के पूर्व कुलपति प्रो मनोज कुमार को पुस्तकालय की ओर से सदन में भूपेंद्र नारायण मंडल पुस्तक भेंट की.
डॉ राठौड़ ने प्रो मनोज के अतिरिक्त विशिष्ट अतिथि बिहार सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष चंद्रभूषण, सम्मानित अतिथि सर्व सेवा संघ के मंत्री विजय कुमार एवं गांधीवादी कार्यकर्ता सीमा कुमारी को भूपेंद्र नारायण मंडल एवं कीर्ति नारायण मंडल की स्वरचित संक्षिप्त जीवनी भेंट कर भी सम्मानित किया. इस अवसर पर टीपी कॉलेज के प्रधानाचार्य सह सामाजिक विज्ञान के संकायाध्यक्ष प्रो कैलाश प्रसाद यादव, पूर्व विकास पदाधिकारी प्रो ललन आद्री, एनएसएस के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ सुधांशु शेखर भी उपस्थित थे.– ”” 24 बार बिहार आगमन एवं चार सौ से अधिक दिन के प्रवास को समझने का मौका दे रहा संवाद –
आजाद पुस्तकालय के सचिव डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कहा कि बिहार में बापू संवाद कार्यक्रम सूबे के अलग-अलग हिस्सों में स्वतंत्रता आंदोलन के दिनों में बापू से जुड़ी यादों को समेटने, संग्रहित करने का बड़ा माध्यम साबित होगा. इसका लाभ भावी पीढ़ियों को व्यापक रूप से मिलेगा. वहीं यह संवाद बापू के सपनों से जुड़े संस्थाओं, संगठनों को फिर से पुनर्जीवित ही नहीं करेगा, बल्कि उसकी जड़ों में जान भी डालेगा. मालूम हो कि दक्षिण अफ्रीका से 21 वर्षों बाद गांधी भारत 1915 के नौ जनवरी को मातृभूमि की सेवा के लिए आये एवं पहली बार 10 अप्रैल 1917 को बिहार. फिर विभिन्न संदर्भ में गांधी 24 बार बिहार आये एवं लगभग चार सौ दिन से अधिक बिहार में रहे.– बिहार के अन्य हिस्सों सहित कोसी,सीमांचल से बापू का रहा जीवंत जुड़ाव –
संवाद को निकली टीम ने बताया कि कोसी-सीमांचल में भी गांधी की काफी यादें हैं एवं यहां कई गांधीवादी संस्थाएं भी सक्रिय हैं. गांधी 1920, 1927,1934 के वर्षों में दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, राजनगर, सहरसा, निर्मली आये थे. 1925 में कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, फारबिसगंज तथा 1934 में कटिहार फारबिसगंज अररिया पुलकाना, पूर्णिया, टिकापट्टी तथा रूपसी गये हैं. इस दौरान व्यापक स्तर पर पदयात्रा भी की, लेकिन उससे जुड़ी यादें धीरे-धीरे धूमिल हो रही हैं. उन्हीं यादों को समेटने का प्रयास है. क्षेत्रीय इतिहास का संकलन एवं गांधी के संस्मरणों को एकत्र करने के उद्देश्य में यह कारगर हो इसलिए यह सफर शुरू किया गया है. सर्वोदय मंडल द्वारा जारी सफर के आलोक में टीपी कॉलेज में संवाद के लिये डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने टीपी कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो कैलाश प्रसाद यादव एवं भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के एनएसएस पदाधिकारी डॉ सुधांशु शेखर का विशेष आभार जताया. जिनके सहयोग से छुट्टी के दिन भी सार्थक एवं सफल संवाद सफलता पूर्वक संभव हो सका.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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