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सदर अस्पताल में मिला युवती को नया जीवन

डाॅ आरके रवि कुमार मधेपुरा : गरीबी में जन्म लिया. किशोरावस्था में महिलाओं में होने वाले बदलाव से भी अनजान रही. शादी हुई, तो पति ने छोड़ दिया. लगातार चार वर्ष से हर अस्पताल का चक्कर काट चुकी इस युवती का सफल ऑपरेशन सदर अस्पताल मधेपुरा में संभव हुआ. तमाम जांच से हर्निया बताया गया. […]

डाॅ आरके रवि कुमार

मधेपुरा : गरीबी में जन्म लिया. किशोरावस्था में महिलाओं में होने वाले बदलाव से भी अनजान रही. शादी हुई, तो पति ने छोड़ दिया. लगातार चार वर्ष से हर अस्पताल का चक्कर काट चुकी इस युवती का सफल ऑपरेशन सदर अस्पताल मधेपुरा में संभव हुआ. तमाम जांच से हर्निया बताया गया. लेकिन, जब ऑपरेशन प्रारंभ हुआ तो डॉक्टर अचंभित रह गये. उस युवती के एक तरफ की ओवरी व फेलिपियन ट्यूब समेत बच्चेदानी में सूजन होकर हर्नियां के साथ फंसा हुआ था.
ऐसे विरले मामले में ही होते हैं. डॉक्टर द्वारा उसे अलग कर फिर से एबडोमिनल केविटी में डाल दिया गया और हर्निया की सफलता से ऑपरेशन करते हुए सभी लेयर को सिल दिया गया. ऑपरेशन सफलता पूर्वक करने वाले सदर अस्पताल के सर्जन डाॅ आरके रवि ने कहा कि इस तरह का मामला कभी-कभी ही सामने आता है. इसी वजह से यह लड़की मां नहीं बन पा रही थी. लेकिन, अब वह मां बन सकेगी.
शौकत अली ने की पहल : जिले के सुखासन में रहने वाली युवती अपने पिता की छोटी पुत्री है. इंटर में पढ़ रही इस लड़की की शादी भी हो गयी. लेकिन पति ने यह कह कर कि बच्चा नहीं हो रहा है उसे छोड़ दिया. गरीब पिता किसी तरह बिजली मिस्त्री का कार्य कर गुजारा कर रहे हैं. उस पर से लगातार चार साल से डॉक्टरों का चक्कर काटते-काटते परिवार की माली हालत बिल्कुल खराब हो गयी. इसी बीच हम की महिला प्रखंड अध्यक्ष अनिषा कुमारी ने इस लड़की का हाल जानने के बाद पार्टी के जिलाध्यक्ष व समाजसेवी शौकत अली को अवगत कराया. उसके बाद वे सदर अस्पताल के डॉक्टरों के पीछे पड़ गये. बोर्ड का गठन हुआ. लड़की की जांच हुई. यह भी पता चला कि उस युवती के पास एक ही किडनी है.
मां नहीं बन पाने के कारण पति ने छोड़ दिया था
ऑपरेशन की सफलता के बाद अब मां बन सकेगी युवती
रेयरेस्ट श्रेणी में आता है यह ऑपरेशन
डॉक्टर ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं हो रहे थे, पर एम्स व अपोलो अस्पताल में कार्य कर चुके युवा डाॅ आरके रवि कुमार ने ऑपरेशन की जिम्मेवारी ली. बकोल डॉ रवि इस तरह के मामले रेयर ऑफ द रेयरेस्ट के श्रेणी में आते है. ऑपरेशन शुरू होने तक इस बात का अंदाजा तक नहीं था कि इंग्युनल हर्निया में इस तरह की जटिलता होगी. पेट खोलने के बाद जब देखा कि हर्निया के कनटेंट में ओवरी फेलिपियन ट्यूब एट्रोफिड बच्चेदानी है तो बेहद सावधानी से उसे अलग किया गया.
इसके बाद हर्निया के लेयर की सिलाई कर बंद किया गया और तब इन अंगों को उनके सही जगह पर ला कर पेट की सिलाई की गयी. लड़की अब अपना सामन्य जीवन जी सकती है. ऑपरेशन टीम में नर्स पूनम कुमारी, ओटी सहायक राजेंद्र रावत, विपीन कुमार शामिल थे. अस्पताल प्रबंधक संजीव कुमार सिन्हा ने कहा सदर अस्पताल द्वारा लगातार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का प्रयास जारी है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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