समस्याओं के जाल में फंसा पशु औषधालय

Published at :30 Apr 2016 8:23 AM (IST)
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समस्याओं के जाल में फंसा पशु औषधालय

जिले में पशु चिकित्सालय में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. इस कारण पशुपालक को मवेशियों के इलाज में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. विजय कुमार मधेपुरा : जिले में पशु चिकित्सालय कई समस्याओं से जूझ रहा है. इस कारण पशु चिकित्सालय में मवेशियों के इलाज में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. […]

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जिले में पशु चिकित्सालय में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. इस कारण पशुपालक को मवेशियों के इलाज में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
विजय कुमार
मधेपुरा : जिले में पशु चिकित्सालय कई समस्याओं से जूझ रहा है. इस कारण पशु चिकित्सालय में मवेशियों के इलाज में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जिला मुख्यालय स्थित अनुमंडलीय पशु औषधालय व प्रखंड क्षेत्र के पशु औषधालय में कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. साथ ही जिला पशुपालन कार्यालय में इससे अछूता नहीं है. विशेष कर इन पशु औषधालय में स्टाफ व डॉक्टरों की कमी के कारण पशुओं की चिकित्सा में परेशानी का सामना करना पड़ता है.
जिले में कई ऐसे पशु औषधालय है, जहां एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं है और जहां डॉक्टर है वहां स्टाफ की कमी है. ऐसे में पशुओं के इलाज में कई तरह की समस्याएं सामने आती है. जिसका परिणाम होता है मवेशी पालक किसी प्राइवेट डॉक्टर या ग्रामीण चिकित्सक से ही पशुओं का इलाज करवाते है और बाहर में इलाज करवाने में ज्यादे पैसे खर्च करना पड़ता है.
जिले में पशु चिकित्सालय की स्थिति : जिले में 25 पशु चिकित्सालय मौजूद है. जिनमें 19 चिकित्सालय स्थायी रूप से कार्यरत है और छह चिकित्सालय अस्थायी रूप से कार्यरत है. इन चिकित्सालय में दवा के मौजूदगी के बावजूद पशुओं के इलाज में परेशानी आती है. सुविधाओं के अभाव के कारण पशुपालक अपने पशुओं को इलाज के लिए लाना बेहतर नहीं समझते है. वे किसी निजी डॉक्टर से इलाज करा कर ज्यादे पैसे खर्च करने में ही अपनी भलाई समझते है.
डॉक्टर, अनुसेवक, रात्रि प्रहरी का पद है खाली : जिले के कई पशु चिकित्सालय में वर्षों से डॉक्टर, अनुसेवक व रात्रि प्रहरी का पद रिक्त पड़ा है. रात्रि प्रहरी नहीं होने के कारण इन पशु चिकित्सालय में हमेशा चोरी का भय बना रहता है. वहीं अनुसेवक व डॉक्टरों के नहीं होने से पशुपालकों को अपने पशुओं के इलाज करवाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है.
अनुसेवक व रात्रि प्रहरी का लगभग 24 पद खाली पड़ा हुआ है.
पशु चिकित्सालय में दवा की स्थिति : दवा स्थिति के संबंध में जिला पशुपालन कार्यालय से मिली रिपोर्ट के आधार पर जिले में पशु चिकित्सालय के लिए 20 प्रकार की दवा मौजूद है. जिनमें भुख बढ़ाने, बांझपन, एफएमडीओ, क्रिमी, पेट संबंधी रोग, डायरिया, मुंह फरका, बुखार आदि से संबंधित दवा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है.
नहीं है िबजली : जिले के कई ऐसे पशु औषधालय हैं, जहां बिजली की समस्या बनी रहती है. जिला मुख्यालय स्थित पशु औषधालय, जिला पशु औषधालय कार्यालय में बिजली है, लेकिन वोल्टेज की समस्या बनी रहती है. वाल्टेज कम रहने के कारण कार्य में परेशानी होती है. कर्मियों ने बताया कि विभाग को दो बार सूचना दी गयी है, लेकिन गरमी होने के बावजूद ही इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है.
कहते हैं अधिकारी : जिला पशु पालन पदाधिकारी डाॅ उपेंद्र नारायण प्रसाद सिंह ने कहा कि जिले में पशु औषधालयों में स्टाफ व डॉक्टर की कमी है. इस कारण पशुओं इलाज में परेशानी आती है. समस्याओं के लिए संबंधित विभाग को सूचना दी गयी है, जहां डॉक्टर व कर्मी नहीं है. वहां प्रभार में औषधालय का कार्य सुचारु रूप से चल रहा है. मवेशियों को होने वाले रोगों के लिए प्रचुर मात्रा में दवा उपलब्ध है.
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