सड़क जर्जर, दुर्घटना की बनी रहती है आशंका

Published at :21 Apr 2016 6:05 AM (IST)
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सड़क जर्जर, दुर्घटना की बनी रहती है आशंका

उफ! चौसा-टपुआ सड़क का निर्माण अब तक नहीं हुआ पूरा चौसा : कई गांव को जोड़ने वाली चौसा-टपुआ सड़क का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सड़क पर मैटल रहने के कारण लोगों को पांव पैदल भी चलना मुश्किल है. इस सड़क से रोजना हजारों […]

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उफ! चौसा-टपुआ सड़क का निर्माण अब तक नहीं हुआ पूरा

चौसा : कई गांव को जोड़ने वाली चौसा-टपुआ सड़क का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सड़क पर मैटल रहने के कारण लोगों को पांव पैदल भी चलना मुश्किल है. इस सड़क से रोजना हजारों लोगों का आना जाना लगा रहता है. सड़क के दोनों ओर बने घर में रह रहे परिवारों को इस बात का डर बना रहता है
कि कहीं सड़क पर गिरे मैटल से उनका नुकसान ना हो जाए. सड़क पर मैटल गिरा देने के कारण लोगों को दुर्घटना का डर बना रहता है. दूसरी ओर सड़क पर पड़े धुल के कारण लोगों का रहना परेशानी का सबब बन गया है. गांव के लोगो का कहना है कि निर्माधीन सड़क पर अब तक कई घटना हो चुका है लेकिन प्रशासन की ओर से कोई इंतजाम नहीं किया गया है.
एक साल में बननी थी सड़क : प्रधानमंत्री सड़क योजना से बनाये जा रहे उक्त सड़क को एक वर्ष में पूरा कर लिया जाना था. दो करोड़ 48 लाख की लागत से बनने वाली इस सड़का आधारिशला वर्ष 2013 के मई महीने में पूर्व मंत्री तथा आलमनगर के वर्तमान विधायक नरेंद्र नारायण यादव ने रखा था. दो वर्ष पूरा होने के बाद भी सड़क का नहीं बनाना लोगों को चिंता के साथ परेशानी में डाल दिया है.
ग्रामीण की परेशानी : स्थानीय ग्रामीण गुलशन कुमार का कहना है कि सड़क का निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के कारण इस सड़क पर आये दिन दुर्घटनाएं होती रहती है. दुर्घटना के कारण अबतक कई लोग बुरी तरह घायल हो चुके है. ढाई साल बीत जाने के बाद भी बारह महीने का काम पूरा नहीं किया जा सका है. पंकज कुमार राज बताते हैं कि गांव में पक्की पीसीसी ढलाई की गयी तो गुणवत्ता ठीक नहीं है. जगह ढलाई की गयी सड़क टूट टूट कर अलग हो गये. पीसीसी ढलाई के किनारे मिट्टी के अभाव में ढलाई के किनारे अंदर से मेटल बाहर निकल रहे है. परिणाम स्वरूप सड़क कमजोर होता जा रहा है. विक्रम चौधरी बताते हैं इस सड़क से हो कर प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों का लगातर आना जाना लगा रहता है लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया. वाहन चालकों के लिए यह मार्ग परेशानियों का सबब बनता जा रहा है. ग्रामीण अरूण रजक का कहना है कि तीन किलोमीटर की बनने वाली इस सड़क का निर्माण कछुअे के चाल से हो रहा है. जिसके कारण पांव पैदल भी चलना मुश्किल हो रहा है. वहीं ग्रामीण बेचन मंडल कहते हैं कि टपुआ टोला से नरघुटोसा होते हुए मुख्यालय चौसा तक छोटे – बड़े वाहनों की सबसे अधिक वाहन आवाजाही इसी मार्ग से होती है. यदि इस सड़क निर्माण जल्द से जल्द नहीं किया गया तो शायद एक बड़ा हाद होने से कोई नहीं रोक सकता है.
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