किसानों पर टिका है देश का विकास

Published at :19 Apr 2016 2:03 AM (IST)
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किसानों पर टिका है देश का विकास

मधेपुरा : जिला मुख्यालय स्थित कृषि विज्ञान केंद्र रबी किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन का उद्घाटन सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया. मौके पर सांसद ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है. किसानों के कंधे पर ही देश का विकास टिका है. किसानों की समस्या के समाधान […]

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मधेपुरा : जिला मुख्यालय स्थित कृषि विज्ञान केंद्र रबी किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन का उद्घाटन सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया. मौके पर सांसद ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है. किसानों के कंधे पर ही देश का विकास टिका है.

किसानों की समस्या के समाधान के लिए एमआरटीपी अधिनियम 1969 के तहत कठोर प्रावधान बनाये गये हैं. इसके अंतर्गत कृषि उत्पादों के निर्माता कंपनियों के लिए उपभोक्ता सेवा केंद्रों की स्थापना की गयी है. यहां एक सक्षम पदाधिकारी होते है जो उस केंद्र के लिए निर्धारित टेलीफोन पर किसानों के संपर्क में रहेंगे. इन नंबरों पर फोन कर किसान उत्पाद विशेष के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

कृषि उत्पादों के सभी पैंकेट पर भी ये टेलीफोन नंबर अंकित किया जाना है. इसका पालन न होने पर अधिनियम के अंतर्गत दंडनीय अपराध माना जायेगा. बिहार में कृषि संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञों से संपर्क करने के लिए नि:शुल्क किसान हेल्प लाइन संख्या 0641, 2451035 को प्रसारित है.
इस अवसर पर जिला पदाधिकारी मो सोहैल ने कहा कि नयी बीमा योजना में आग लगने के अलावा बिजली गिरने, तूफान, ओला पड़ने, चक्रवात, अंधड़, बवंडर, जमीन धंसने, सूखा, खराब मौसम, कीट एवं फसल को होने वाली बीमारियां आदि एक ऐसा बीमा कवर दिया जायेगा. जिसमें इनसे होने वाले सारे नुकसान से सुरक्षा प्रदान की जायेगी.
अगर बीमित किसान बुआई रोपाई के लिए खर्च करने के बावजूद खराब मौसम की वजह से बुआई – रोपाई नहीं कर सकते है तो वे बीमित राशि 25 प्रतिशत तक नुकसान का दावा ले सकेंगे. फसल कटाई के बाद रखी फसल को चक्रवात, बेमौसम बारिश और स्थानीय आपदा जैसे ओलावृष्टि, जमीन धंसने और जल भराव से होने वाले नुकसान का अंदाजा प्रभावित खेत के आधार पर किया जायेगा और इसके अनुसार किसानों के नुकसान का आकलन करके दावे तय किये जायेंगे.
विशेषज्ञ किसान शंभू शरण भारतीय ने कहा कि फसल बीमा खेती से जुड़े जोखिम व आपदाओं की वजह से होने वाले नुकसान से किसानों की रक्षा करने का जरिया है. इससे अचानक आये जोखिम या खराब मौसम से फसल को हुए नुकसान की भरपाई की जाती है.
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना और संशोधित कृषि बीमा योजना को रबी 2015-16 के बाद बंद कर किसानों को अधिक सुरक्षा देने के लिए अब खरीफ 2016 से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की जा रही है.
इस अवसर पर जिला कृषि पदाधिकारी यदुनंदन प्रसाद यादव, आत्मा के परियोजना पदाधिकारी राजन बालन विषय वस्तु विशेषज्ञ डा मिथिलेश कुमार राय, नूतन कुमारी, कार्यक्रम समन्वयक डा वीके जयसवाल ने बीज, अनाज प्रसंस्करण एवं भंडारण पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालते हुए किसानों को महत्वपूर्ण जानकारियां दी. इस अवसर पर कृषक समाचार का लोकापर्ण किया गया. कृषक समाचार के संरक्षक सबौल विवि भागलपुर के कुलपति एके सिंह, मार्ग दर्शक डा एस के राय, डा आरके सोहाने, डा उमेश सिंह एवं प्रकाश कार्यक्रम समन्वयक डाॅ मिथिलेश कुमार राय है.
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