हाइकोर्ट . ऑटो रिक्शा संघ सहरसा ने डाली थी याचिका
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :11 Mar 2016 5:35 AM (IST)
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बैरियर वसूली पर रोक संबंधी याचिका खारिज जिला ऑटो रिक्शा संघ सहरसा के सचिव रामचंद्र यादव की ओर से ऑटो चालकों से बस स्टैंड के संवेदक द्वारा वसूले जा रहे शुल्क पर रोक लगाने के लिए उच्च न्यायालय में दायर याचिका को खारिज कर दिया गया है. इससे पहले कोर्ट ने याचिका पर सुनवायी करते […]
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बैरियर वसूली पर रोक संबंधी याचिका खारिज
जिला ऑटो रिक्शा संघ सहरसा के सचिव रामचंद्र यादव की ओर से ऑटो चालकों से बस स्टैंड के संवेदक द्वारा वसूले जा रहे शुल्क पर रोक लगाने के लिए उच्च न्यायालय में दायर याचिका को खारिज कर दिया गया है. इससे पहले कोर्ट ने याचिका पर सुनवायी करते हुए अगले आदेश तक शुल्क की वसूली पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया था.
मधेपुरा : ऑटो चालकों से बस स्टैंड के संवेदक द्वारा वसूले जा रहे शुल्क पर रोक लगाने के लिए उच्च न्यायालय में दायर याचिका को खारिज कर दिया गया है. हाइकोर्ट के इस आदेश के बाद ऑटो चालकों में मायूसी छा गयी है. वहीं संवेदकों में इत्मीनान के भाव हैं. वादी ने 31 अगस्त 2012 को मामला दायर किया गया था. एलपीए नंबर 1415/12 सीडब्लयूजेसी नंबर 13459/12 मामले की सुनवायी करते हुए 09 मार्च 2016 को कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया.
इससे पहले कोर्ट के बैरियर पर तत्काल रोक के आदेश को लेकर अमल कराने के लिए ऑटो चालक संघ ने जिलाधिकारी के कार्यालय में आवेदन भी दिया था. निर्देश के आलोक में तत्काल कार्रवाई करते हुए मधेपुरा, सिहेंश्वर, मुरलीगंज, आलमनगर सहित अन्य जगहों पर हो रही बैरियर वसूली पर रोक लगाने का निवेदन किया था. संघ ने माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति भी आवेदन के साथ संलग्न की थी.
संघ ने आवेदन में कहा था कि रामचंद्र यादव ने ऑटो चालकों से टैक्स वसूली के संबंध में मामला माननीय उच्च न्यायालय में दायर किया था. उच्च न्यायालय ने सुनवायी के बाद दिनांक 05- 08- 2015 को विस्तृत आदेश पारित किया गया है. तदनुसार दिनांक 30 – 01 – 2016 को अग्रिम सुनवायी करते हुए सरकार या स्टेट या नगर परिषद द्वारा संतोषजनक व्यवस्था नहीं रख पाने के कारण सहरसा एवं मधेपुरा जिला में किसी भी तरह के टैक्स या शुल्क वसूली पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी.
अब हाइकोर्ट के इस निर्णय के बाद ऑटो चालकों में मायूसी है. संघ के महासचिव राजा रमण ने कहा कि कोर्ट का आदेश सर्वोपरि है लेकिन आदेश का पूर्ण अध्ययन करने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा.
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