महावीर बाबू के जीवन से मधेपुरा के छात्रों को मिलेगी दिशा

Published at :04 Jan 2016 7:16 PM (IST)
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महावीर बाबू के जीवन से मधेपुरा के छात्रों को मिलेगी दिशा

महावीर बाबू के जीवन से मधेपुरा के छात्रों को मिलेगी दिशा – जिला मुख्यालय के टीपी कॉलेज महावीर बाबू के 90 वीं जयंती समारोह पर बोले शिक्षाविद प्रतिनिधि, मधेपुराजिला मुख्यालय में आयोजित महान शिक्षाविद् एवं बीएनएमयू के पूर्व कुलपति सह राजनेता डा महावीर प्रसाद यादव की 90 वीं जयंती समारोह पर शिक्षाविदों ने उनके जीवन […]

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महावीर बाबू के जीवन से मधेपुरा के छात्रों को मिलेगी दिशा – जिला मुख्यालय के टीपी कॉलेज महावीर बाबू के 90 वीं जयंती समारोह पर बोले शिक्षाविद प्रतिनिधि, मधेपुराजिला मुख्यालय में आयोजित महान शिक्षाविद् एवं बीएनएमयू के पूर्व कुलपति सह राजनेता डा महावीर प्रसाद यादव की 90 वीं जयंती समारोह पर शिक्षाविदों ने उनके जीवन चरित को मधेपुरा के शिक्षा विकास में मील का पत्थर बताया. टीपी कॉलेज परिसर स्थित सभा भवन में संपन्न समारोह में साहित्यकार भूपेंद्र नारायण मधेपुरी जी ने कहा कि संस्थापक प्राचार्य श्रद्धेय रतन चंद ने टीपी कॉलेज के रूप में शिक्षा का एक बीज बोया था, यह वट वृक्ष बन गया है. इस वट वृक्ष को डा महावीर ने विश्वकर्मा बन कर विराट बना दिया. वहीं मंत्री विजेंद्र बाबू ने अपने वित्त मंत्री रहने के दौरान इस क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए राशि का प्रावधान किया. इसके लिए वे धन्यवाद के पात्र है. महावीर बाबू के कार्यक्रम में आ कर उन्होंने महावीर बाबू को श्रद्धा सुमन अर्पित किया है. जयंती समारोह को संबोधित करते हुए डा शैलेद्र कुमार ने कहा कि महावीर बाबू के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि इस क्षेत्र के गरीब व कमजोर तबके के छात्रों को सही शिक्षा व दिशा प्रदान की जाये. डा शिवनारायण यादव ने कहा कि आज महावीर बाबू हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनके उच्च और सात्विक विचार, उनकी सेवा भावना और कर्तव्य बोध हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा. प्राचार्य डा एचएलएस जौहरी ने कहा कि महावीर बाबू आध्यात्मवादी थे. ईश्वर में उनकी पूर्ण आस्था थी. यही कारण है कि वे अपने वक्तृता में सदैव वेद, उपनिषद् एवं गीता का उदाहरण देते थे. जीवन के अंतिम चरण में भी वे आध्यात्मिक पुस्तकों के अनुशीलन में निरत रहते थे. पूर्व प्रतिकुलपति डा के के मंडल ने कहा कि टीपी कॉलेज के प्राचार्य के रूप में उन्होंने साबित कर दिया कि वे एक सफल शिक्षक, कठोर एवं न्यायप्रिय प्रशासक है और वे कॉलेज के विश्वकर्मा थे. उन्होंने कहा था कि जब कच्चे मकान थे तो पक्के छात्र कॉलेज से निकलते थे. लेकिन पक्के मकान होने पर कॉलेज से कच्चे छात्र निकल रहे है. कुलपति के निजी सचिव शंभु यादव ने कहा कि महावीर बाबू सांसद रहते हुए भी प्रधानाचार्य के कर्तव्य के प्रति किंचित उदासीनता कभी नहीं दिखाई दिये. उन्होंने कहा कि एक आदर्श शिक्षक, उप प्राचार्य, विधायक, मंत्री, प्राचार्य , प्रति कुलपति , सांसद एवं कुलपति के रूप में महावीर बाबू सदा याद रहेंगे.

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