प्रेशर हॉर्न से परेशान है मधेपुरा, प्रशासन नहीं कर रहा कार्रवाई
Updated at : 12 May 2018 4:04 AM (IST)
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दोपहिया वाहनों के बेलगाम प्रेशर हॉर्न मधेपुरा : शहर इन दिनों दो पहिया वाहनों के प्रेशर हॉर्न से परेशान है. पाबंदी के बावजूद इनका उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है. हालांकि पुलिस को यह कर्कश आवाज सुनाई नहीं देती. कभी-कभार केवल रस्मी तौर पर प्रेशर हार्न बजाने पर पुलिस या परिवहन विभाग के चालान जरूर […]
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दोपहिया वाहनों के बेलगाम प्रेशर हॉर्न
मधेपुरा : शहर इन दिनों दो पहिया वाहनों के प्रेशर हॉर्न से परेशान है. पाबंदी के बावजूद इनका उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है. हालांकि पुलिस को यह कर्कश आवाज सुनाई नहीं देती. कभी-कभार केवल रस्मी तौर पर प्रेशर हार्न बजाने पर पुलिस या परिवहन विभाग के चालान जरूर कटते हैं. खास बात यह है कि इन दोनों विभागों के पास वाहनों के हॉर्न की आवाज को मापने के लिए उपकरण भी नहीं है. इस दिशा में बड़े शहर के मॉडल को अपनाने की दिशा में पहल करना चाहिए, जिसके तहत वहां चालान ही नहीं काटे जाते हैं, बल्कि प्रेशर हार्न निकाल लिये जाते हैं और उन्हें नष्ट कर दिया जाता है.
नहीं है विभाग के पास ध्वनि प्रदूषण मापक यंत्र: डीटीओ विभाग के पास ध्वनि प्रदूषण मापक यंत्र तक नहीं है, जिससे कि वे किसी भी हॉर्न की जांच कर यह जानकारी ले सकें कि वह प्रेशर हॉर्न की श्रेणी में आता है या नहीं. बिना मापक यंत्र के ही अपने स्तर से जांच कर प्रेशर हॉर्न होने का अंदाजा लगाने के बाद जुर्माना वसूल कर गाड़ियों को छोड़ दिया जाता है
कैसे हॉर्न आते हैं प्रेशर हॉर्न की श्रेणी में:
अगर किसी हॉर्न की ध्वनि 70 डेसिबल से अधिक है, तो वह प्रेशर हॉर्न की श्रेणी में आ जाता है. इससे कम हुई तो उसे साधारण हॉर्न माना जाता है. वाहनों के शोरूम में नॉमर्ल हॉर्न ही दिये जाते हैं.
कॉलेज से आते वक्त दो बार प्रेशर हॉर्न की वजह से एक्सीडेंट होते-होते बच गये हैं. हॉर्न से दिमाग कुछ समय के लिए काम करना बंद कर दिया. हमें तो रोज परेशानी होती है.
सपना कुमारी, आजाद चौक
मैं अपने फ्रेंड के साथ स्कूटी पर जा रही थी. लगातार प्रेशर हॉर्न बजने से परेशानी हुई थी. मेरी फ्रेंड ने स्कूटी बंद कर दी. अक्सर अटेंशन पाने के लिए ऐसे हॉर्न का यूज करते हैं.
संध्या, मधेपुरा
इससे शहर में ध्वनि प्रदूषण तो होता ही है. साथ ही कई बार इससे ट्रैफिक भी जाम हो जाता है. साथ ही हमारे सुनने की कैपिसिटी भी प्रभावित होती है.
मधु, कॉलेज चौक
बेवजह हॉर्न बजाने से सड़क पर चलने के दौरान परेशानी होती है और इससे एक्सीडेंट की घटनाएं बढ़ती है. साथ ही दिल के मरीजों को इससे कई बार परेशानी होने लगती है.
निशांत, मधेपुरा
हर माह सैकड़ों की संख्या में बढ़ रही बाइक
शहर से लेकर गांव तक में लोग ध्वनि प्रदूषण से जूझ रहे है. इसकी वजह बाइक के प्रेशर हॉर्न हैं. बाइक की बढ़ती संख्या के अनुसार प्रेशर हॉर्न की संख्या भी बढ़ी है. ये हॉर्न अलग-अलग तरह की तेज आवाज निकालते हैं. नयी उम्र के लोग इस हॉर्न का इस्तेमाल ध्यान आकृष्ट करने और खासतौर पर महिला या लड़कियों को आतंकित करने को करते हैं. अचानक हार्न बजाने से महिलाएं हड़बड़ा जाती हैं. कई बार उनके साथ असहज स्थिति बन जाती है और गिर जाती हैं.
बढ़ जाता है तापमान
एक तो पहले से ही शहर का अधिकतम तापमान 37 डिग्री के पार जा रहा है. ऐसे में दोपहर के वक्त स्कूली वाहन भट्ठी की तरह बन जाते हैं. अधिकतर स्कूलों में तीन पहिया वाले ऑटो और बसों को स्कूली वाहन के रूप में प्रयोग किया जाता है. इन वाहनों में बच्चों को ठूंस-ठूंस का बैठाया जाता है. 90 फीसदी स्कूली वाहन में एसी की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में दोपहर के समय इन स्कूली वाहनों के अंदर का तापमान बाहर के तापमान से पांच डिग्री अधिक बढ़ जाता है.
नहीं लेते हैं निर्णय
शहर के स्कूलों के हालात ऐसे हैं कि चाहे कितनी भी गर्मी पड़े, स्कूल प्रबंधन अपने स्तर पर गर्मी के अवकाश लेने का निर्णय नहीं करता है. आपसी प्रतिस्पर्धा को लेकर स्कूलों को एक दूसरे के बंद नहीं होने का हवाला देकर स्कूल चलाते रहते हैं. शहर के लगभग सभी स्कूलों को जिला प्रशासन की ओर से अवकाश घोषित होने का इंतजार रहता है और प्रशासन को अपने स्तर से स्कूली बच्चों को परेशानी नहीं दिखती.
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