आवारा पशुओं की ठौर बनीं शहर की सड़कें

मधेपुरा : आमतौर पर लोगों का झुंड यदि एक साथ बैठकर गप्पे हांकता मिलता है, तो लोगों के मुंह से बरबस निकल आता है- क्यों भाई किस बात की पंचायत हो रही है. इस नजरिये से शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं की पंचायत लगती है. इनके लिए कोई जगह तय नहीं है. जब, जहां […]
मधेपुरा : आमतौर पर लोगों का झुंड यदि एक साथ बैठकर गप्पे हांकता मिलता है, तो लोगों के मुंह से बरबस निकल आता है- क्यों भाई किस बात की पंचायत हो रही है. इस नजरिये से शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं की पंचायत लगती है. इनके लिए कोई जगह तय नहीं है. जब, जहां इनकी मर्जी होती है पंचायत लगा देते हैं.
शहरवासियों के लिए यह सबसे बड़ी समस्या है. मुख्य सड़कों से लेकर गलियों तक में इन आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है. ये सड़क पर ब्रेकर की तरह पड़े रहते हैं. इन आवारा पशुओं से निबटने के लिए नगर परिषद कतई संजीदा नजर नहीं आ रहा.
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