लोक आस्था का महापर्व शुरू, कद्दू भात आज
Updated at : 24 Oct 2017 5:10 AM (IST)
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महापर्व छठ. बाजारों में खरीदारी करने वालों की उमड़ी भीड़, 50 से 80 रुपये पीस तक बिका कद्दू मधेपुरा : चार दिनों तक मनाया जाने वाला लोक आस्था का महापर्व छठ आज से शुरू हो रहा है. पर्व का पहला दिन नहाय खाय से शुरू होकर कद्दू भात के साथ संपन्न होगा. वहीं दूसरे दिन […]
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महापर्व छठ. बाजारों में खरीदारी करने वालों की उमड़ी भीड़, 50 से 80 रुपये पीस तक बिका कद्दू
मधेपुरा : चार दिनों तक मनाया जाने वाला लोक आस्था का महापर्व छठ आज से शुरू हो रहा है. पर्व का पहला दिन नहाय खाय से शुरू होकर कद्दू भात के साथ संपन्न होगा. वहीं दूसरे दिन यानी कल खरना होगा. खरना के रोज व्रती दिन भर उपवास रखकर शाम को अरवा भोजन करेगी. इस अवसर पर जिला मुख्यालय के अलावा सिंहेश्वर बाजार सहित विभिन्न बाजारों में को छठ पर्व की खरीदारी करने वालों की भीड़ उमड़ गयी. छठ महापर्व को लेकर बाजारों में भीड़ से जहां लोग परेशान है,
उससे अधिक परेशान लोग बढ़ती महंगाई से है. खरीदार बताते है कि दिनों -दिन बढ़ती महंगाई से आमजनों को कठिनाई हो रही है. पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष सभी चीजें की दाम में वृद्धि हुई है. छठ के दौरान बाजार में डाला, सूप, नारियल, टाभ व नींबु की दुकानों पर अधिक भीड़ थी. बाजार में कद्दू का दाम आम दिनों के अपेक्षा अधिक देखी गयी. जहां पिछले बार कदुआ -भात के लिए कदुआ 20 – 25 रुपये जोड़ी मिल रही थी, वहीं इस बार 50-80 रुपये तक बिक रहा है.
बाजार में सौ रुपये तक बिका कद्दू. चार दिवसीय महापर्व छठ के पहले दिन मंगलवार को कद्दू भात होना है. कद्दू भात को लेकर बाजार में कद्दू की डिमांड देखी गयी. सुबह में 50 से 60 रुपया में कद्दू छठवर्तियों को आसानी से मिला, लेकिन शाम होते ही बाजार में कद्दू सौ रुपये तक बिकने लगा. शाम में खरीदारी करने बाजार निकली छठव्रतियों को कद्दू की महंगाई मार गयी. हालांकि महंगा होने के बावजूद छठव्रती कद्दू खरीदने को मजबूर थी.
महंगाई ने सभी पिछले रिकॉर्ड को तोड़े. दुकानदार बताते हैं इस बार कोसी के इलाके में बाढ़ आने से कई फसल बर्बाद हो गयी थी. जिसमें गन्ना, आदि-हल्दी, अलहुआ-मूली, केले की फसल को नुकसान हुआ. दुकानदारों ने ने कहा कि हमलोग सभी चीजों को हमलोग बाहर से मंगवाकर बेचते हैं. आने-जाने में आने वाले खर्च ओर मुनाफे को जोड़कर हमलोग बेचते है. स्थानीय खरीदार राजीव कुमार ने कहा कि इस बार महंगाई ने सभी पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया है.
वहीं एक बुजुर्ग किसान दामोदर ऋषिदेव ने कहा कि हमलोग खेती पर निर्भर है, लेकिन इस बार बाढ़ का पानी आ जाने से सारा फसल बर्बाद हो गया. हमलोग कर्ज लेकर पर्व की सामग्री खरीदने आये हैं.
जाम से हलकान रहा सिंहेश्वर बाजार. सुप्रिसद्ध सिंहेश्वर स्थान में सोमवार को श्रद्धालुओं के अलावा खरीदारी करने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी. इस दौरान सिंहेश्वर बाजार जाम से हलकान रहा. दुर्गा चौक से लेकर पेट्रोल पंप तक गाड़ियों की लाइन लगी रही. सिंहेश्वर बाजार से गुजरने में लोगों को घंटों का समय लग रहा था. बाजार में सड़क पर दुकान सजने व ऑटो चालकों की मनमानी से जाम की यथावत स्थिति प्रत्येक दिन बनी रहती है, लेकिन सड़क पर से अतिक्रमण हटाने को लेकर स्थानीय प्रशासन उदासीन बनी हुई है.
राम व सीता ने उपवास रख की भगवान सूर्य की आराधना. छठ पूजा की परंपरा और उसके महत्व का प्रतिपादन करने वाले कई पौराणिक व लोक कथाएं प्रचलित है. पौराणिक कथा के अनुसार लंका विजय के बाद जब भगवान श्रीराम अयोध्या में रामराज की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम व माता सीता ने उपवास रख कर भगवान सूर्य की आराधना की थी. सप्तमी को सूर्योदय के समय पुन: अनुष्ठान कर सूर्य देवता से आशीर्वाद लिया व रामराज की स्थापना की.
सूर्य की कृपा दृष्टि से महान योद्धा बना था कर्ण. दूसरी मान्यता के अनुसार महापर्व छठ की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी. महाभारत काल में सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्य देवता की पूजा शुरू की थी. कर्ण भगवान सूर्य का परम भक्त था. वह प्रतिदिन घंटों पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ देता था. भगवान सूर्य की कृपा दृष्टि से ही वह महान योद्धा बना था. छठ पूजा में सूर्य को अर्घ देने की परंपरा कायम है.
द्रौपदी ने की थी छठ व्रत, पांडव को मिला था राजपाट.
एक कथा के अनुसार पांडव व कौरव के बीच महाभारत हुआ था. महाभारत होने से पूर्व कौरवों के साथ पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गया, तब द्रौपदी ने छठ व्रत की थी. जिससे द्रौपदी की मनोकामना पूरी हुई, पांडव ने महाभारत में कौरवों पर विजय प्राप्त किया और पांडवों को राजपाट वापस मिल गया था.
महापर्व छठ में खरना का है विशेष महत्व. लोक आस्था है कि महापर्व छठ में खरना का विशेष महत्व है. इस दिन व्रत करने का वाले छठ वर्ती नियम व निष्ठा के साथ रात में रसीया, पूरी, फल इत्यादि से नये वस्त्र पहनकर खरना करती है. खरना करते वक्त यदि मुंह में कंकड़ टकरा जाए या कोई व्यक्ति द्वारा पर्व करने वाले को आवाज भी लगा दे तो उसी वक्त व्रती खाना बंद कर देती है. खरना के बाद सूर्य देवता को अर्घ देने की परंपरा है.
मनोकामना पूर्ण होने पर सभी धर्म के लोग करते है महापर्व छठ. महापर्व छठ के महत्व को सभी धर्मों के लोग आस्था के साथ मानते है. यही कारण है कि हिंदू हो या मुस्लिम मनोकामना पूर्ण होने पर सभी धर्म के लोग छठ पूजा करते हैं. जिले के सिंहेश्वर प्रखंड स्थित पटोरी पंचायत स्थित दुब्बी घाट पर हिंदू व मुस्लिम एक साथ छठ पर्व मनाते हैं. पटोरी वार्ड नंबर सात निवासी मो अली हसन की पत्नी सुबैदा खातून वर्षों से छठ पर्व करती आ रही है. इस परिवार के सभी सदस्य छठ के मौके पर पानी में खड़ा होकर सूर्य को अर्घ देते है.
हिंदू मुस्लिम भाईचारे की कायम हुई मिसाल. छठ व्रती सुबैदा खातून पति मो अलि हसन व ससुर मो नुरो मियां व परिवार के सभी सदस्य जहां हिंदू मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक है. वहीं छठ पर्व से हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल कायम होती हैं. विभिन्न धर्म समुदाय के लोग भी सूर्य उपासना को महत्व देते हैं
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