सुविधा के अभाव में दम तोड़ रहा सदर अस्पताल का आइसीयू भवन

Updated at : 04 Oct 2017 4:11 AM (IST)
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सुविधा के अभाव में दम तोड़ रहा सदर अस्पताल का आइसीयू भवन

मधेपुरा : सदर अस्पताल परिसर में आइसीयू भवन जिलेवासियों को मुंह चिढ़ा रहा है. जिलेवासियों को आवश्यक सुविधाओं से लैस आइसीयू भवन रहने के बावजूद इसका लाभ नहीं मिल रहा है. इसके लिए प्रशासनिक पदाधिकारी को कोस रहे है. लाखों की लागत से अप्रैल 2016 में बन कर तैयार सदर अस्पताल का आइसीयू भवन डेढ़ […]

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मधेपुरा : सदर अस्पताल परिसर में आइसीयू भवन जिलेवासियों को मुंह चिढ़ा रहा है. जिलेवासियों को आवश्यक सुविधाओं से लैस आइसीयू भवन रहने के बावजूद इसका लाभ नहीं मिल रहा है. इसके लिए प्रशासनिक पदाधिकारी को कोस रहे है.

लाखों की लागत से अप्रैल 2016 में बन कर तैयार सदर अस्पताल का आइसीयू भवन डेढ़ वर्ष बाद भी पूर्ण रूप से चालू नहीं हो सका है. लंबे अर्से बाद जिले में आइसीयू भवन बनने पर जिलावासियों में यह आस जगी थी कि अब आपात अवस्था में मरीजों को पटना या दरभंगा का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा,
लेकिन डेढ़ वर्ष बीतने के बाद भी जिले के लोगों की यह उम्मीद विभागीय लापरवाही के कारण पूरी नहीं हो सकी है. आज हालत यह है कि लाखों रुपये की लागत से बने भवन को बकरियों का आरामगाह बना दिया गया है. हर रोज सदर अस्पताल में दर्जनों ऐसे मरीज आते हैं, जिन्हें आइसीयू के अभाव में दरभंगा-पटना रेफर कर दिया जाता है. कुछ तो वहां तक पहुंच पाते हैं, जबकि कुछ रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं. इस बारे में पूछे जाने पर अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं.
वैसे अस्पताल कर्मियों की मानें तो भवन बनने के बाद सरकार द्वारा इसे उपकरण मुहैया तो कराया गया, लेकिन ऑपरेटर उपलब्ध नहीं कराया गया. साथ ही यह भी बताया जाता है कि आइसीयू विशेषज्ञ चिकित्सक भी जिले में उपलब्ध नहीं हैं. आइसीयू भवन बनने के बाद अप्रैल 2016 में जिलाधिकारी द्वारा आइसीयू भवन का विधिवत उद्घाटन भी किया गया था. उद्घाटन के पश्चात औपचारिकता पूरी कर फिर इसे बंद कर दी गयी. इसके बाद बंद आइसीयू को खोलने के लिए कोई ठोस पहल नहीं हो सकी. नतीजन आज यह भवन जानवरों का आरामगाह बन गया है.
आइसीयू के अभाव में सदर अस्पताल महज रेफरल अस्पताल बनकर रह गया है. हर तरह के मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद दरभंगा या पटना रेफर कर दिया जाता है. नतीजा यह होता है कि गरीब मरीजों को सही समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता है. हाल फिलहाल कई घटनाएं घटी है जब प्रारंभिक इलाज के बाद मरीज को रेफर कर दिया गया और रास्ते में ही मरीज ने दम तोड़ दिया. दबी जुबान में चिकित्सक बताते हैं कि सही व्यवस्था नहीं होने के कारण हम मरीज को यहां नहीं रोक सकते हैं. रोकने के बाद अगर किसी तरह की घटना घट जाती है, तो परिजन हंगामा पर उतारू हो जाते हैं.
आइसीयू में स्टॉफ व डॉक्टर नहीं
सदर अस्पताल स्थित आइसीयू भवन में लाखों रुपये के उपकरण व उपस्कर तो सरकार द्वारा मुहैया करा दिया गया, लेकिन इसको चलाने के लिए अब तक ऑपरेटर उपलब्ध नहीं कराया गया है. आइसीयू भवन को फिर से चालू कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई कवायद नहीं की जा रही है.
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