यूजीसी ने बीएनएमयू के कॉलेजों पर ठोका जुर्माना
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :18 Jun 2017 5:24 AM (IST)
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शैक्षणिक माहौल बनाने में फेल हुए दस से अधिक कॉलेज मधेपुरा : भूपेंद्र नारायण मंडल विवि अंतर्गत अंगीभूत कॉलेजों में पठन-पाठन के कार्यों को बढ़ावा न देकर उदासीनता बरतना कॉलेजों को काफी महंगा पड़ गया है. विवि अंतर्गत अधिकांश कॉलेज यूजीसी से रिसर्च ग्रांट के तहत मिले अनुदान की राशि खर्च करने में फेल साबित […]
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शैक्षणिक माहौल बनाने में फेल हुए दस से अधिक कॉलेज
मधेपुरा : भूपेंद्र नारायण मंडल विवि अंतर्गत अंगीभूत कॉलेजों में पठन-पाठन के कार्यों को बढ़ावा न देकर उदासीनता बरतना कॉलेजों को काफी महंगा पड़ गया है. विवि अंतर्गत अधिकांश कॉलेज यूजीसी से रिसर्च ग्रांट के तहत मिले अनुदान की राशि खर्च करने में फेल साबित हुए हैं, जबकि यह राशि कॉलेजों में नियमित अंतराल पर छात्र-छात्राओं के बीच सेमिनार व वर्कशॉप आयोजन पर खर्च करने के लिए दी गयी थी. वर्ष 2008 में प्रत्येक कॉलेजों को यूजीसी से इस मद में 27-27 हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई थी. लेकिन कुछ कॉलेजों को छोड़ कर अधिकतर
यूजीसी ने बीएनएमयू…
कॉलेज राशि को खर्च करने में असमर्थ रहे. इससे यूजीसी के सेमिनार व वर्कशॉप के माध्यम से छात्र-छात्राओं को शिक्षित करने की मुहिम को झटका लगा है. यूजीसी ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए शैक्षणिक माहौल पर खर्च करने में फेल कॉलेजों को लाखों का जुर्माना ठोक दिया. राशि खर्च नहीं करनेवाले कॉलेजों को 27 हजार की राशि के साथ जुर्माना की राशि 25 हजार 200 रुपये जोड़ कर कुल 52 हजार 200 रुपये यूजीसी को लौटाना पड़ेगा. यूजीसी के निर्देश से कॉलेजों में खलबली मच गयी है. हालांकि कुछ कॉलेजों ने इस राशि को खर्च कर उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा कर दिया है.
सेमिनार व वर्कशॉप से छात्र रह गये वंचित
विवि के वर्तमान कुलपति प्रो डाॅ एके राय सेमिनार व वर्कशॉप को बढ़ावा देने के लिए कृतसंकल्पित दिख रहे हैं. लेकिन कॉलेजों की उदासीनता ने कुलपति की मुहिम पर तत्काल पानी फेर दिया है. एक तरफ जहां छात्रों को उच्च शिक्षा के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने पर कई कॉलेज राशि नहीं होने का रोना रो रही है. वहीं दूसरी तरफ यूजीसी से मिले अनुदान को निर्धारित समय पर उपयोग नहीं करने से विवि के हजारों छात्र सेमिनार व वर्कशॉप से वंचित रह गये हैं.
क्या कहते हैं विवि के अधिकारी : बीएनएमयू के सीसीडीसी सह डीएसडब्लू डाॅ अनिलकांत मिश्रा ने बताया कि यूजीसी का पत्र विवि को प्राप्त हुआ है. पत्र से ज्ञात होता है कि कॉलेजों के द्वारा शिथिलता बरती गयी है. चूंकि कॉलेजों को वर्ष 2008 में रिसर्च ग्रांट के तहत सेमिनार व वर्कशॉप आयोजन को लेकर राशि प्राप्त हुई थी. लेकिन राशि खर्च नहीं करने पर प्रत्येक वर्ष दस प्रतिशत सूद जोड़ कर कॉलेजों को राशि लौटानी होगी. विवि प्रशासन ने कॉलेजों की इस लापरवाही को गंभीरता से लिया है. समय पर राशि खर्च नहीं करनेवाले संबंधित कॉलेजों से स्पष्टीकरण पूछा जायेगा.
2008 में प्रत्येक कॉलेजों को यूजीसी से 27-27 हजार रुपये की राशि का हुआ था आवंटन
कॉलेजों को 27 हजार की राशि के साथ जुर्माना की राशि 25 हजार 200 रुपये जोड़ कर कुल 52 हजार 200 रुपये यूजीसी को लौटाना पड़ेगा
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