मधेपुरा कॉलगर्ल मामला: 4 लोगों में डीएसपी को नहीं पहचान सकी महिला, SDPO ने वीडियो कर दिया था वायरल

बिहार के मधेपुरा में कॉलगर्ल मामले की जांच पूरी हो गयी है. महिला के द्वारा लगाया गया आरोप गलत पाया गया. वहीं जांच में कुछ चौंकाने वाले खुलासे भी हुए हैं.
Bihar News: मधेपुरा मुख्यालय डीएसपी अमरकांत चौबे पर महिला द्वारा लगाये गये कॉलगर्ल मंगवाने का लगाया गया आरोप झूठा निकला. आरोप लगाते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था जिससे पुलिस की काफी भद्द पिटी थी. सुपौल एसपी डी अमरकेश के नेतृत्व में चार सदस्यी टीम ने डीआइजी शिवदीप लांडे को रिपोर्ट सौंपी तो चौंकाने वाले खुलासे हुए.
महिला के लगाये गये आरोप का वीडियो वायरल होने व खबर प्रकाशित होते ही मामले को गंभीरता से लेते हुए कोसी प्रक्षेत्र के डीआइजी शिवदीप वामन राव लांडे ने चार सदस्यीय जांच टीम गठित कर 36 घंटे में जांच रिपोर्ट समर्पित करने का आदेश दिया था.
डीआइजी ने बताया कि महिला द्वारा केवल मनगढ़ंत कहानी बना कर पुलिस को बदनाम कर खुद को बचाने की कोशिश की गयी. महिला के मोबाइल नंबर का सीडीआर निकालने व विश्लेषण करने पर पाया गया कि उक्त महिला जुलाई व अगस्त में तीन-तीन बार मधेपुरा गयी है. सदर अस्पताल में महिला का निजी सुरक्षा गार्ड से सांठगांठ का पता चला है.
जांच टीम द्वारा पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय के तीनों मोबाइल नंबर के साथ अंगरक्षक, चालक व आदेश पाल के मोबाइल नंबर का सीडीआर प्राप्त कर विश्लेषण किया गया. जिसमें महिला से कभी भी किसी नंबर द्वारा बात होने की पुष्टि नहीं हुई. इतना ही नहीं महिला द्वारा तीन अन्य व्यक्तियों के साथ डीएसपी मुख्यालय का फोटो दिखाकर पहचानने को कहने पर उक्त महिला मुख्यालय डीएसपी को पहचान तक नहीं पायी.
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डीआइजी ने बताया कि उक्त महिला ने बताया कि महिला रात में किसी पैसेंजर ट्रेन से मधेपुरा गयी और सदर अस्पताल में तैनात अजय नामक सुरक्षा कर्मी के इशारे पर रस्सी से बंधे मेन गेट को खोल आवास में घुस कर मोबाइल चोरी की घटना को अंजाम दिया. जांच टीम द्वारा महिला के इस बात की पुष्टि के लिए भी अजय की पहचान को लेकर डीएसपी के कुक सहित तीन लोगों को महिला के सामने लाया गया. जहां महिला ने डीएसपी के कुक को सदर अस्पताल का सुरक्षा कर्मी बता कर गार्ड रुम में रहने की बात बतायी. जबकि उक्त कर्मी डीएसपी के कुक का काम करता है.
डीआइजी ने बताया कि महिला चोरी के आरोप से बचने के लिए मनगढ़ंत कहानी गढ़कर मुख्यालय डीएसपी पर आरोप लगा रही थी. डीआइजी ने बताया कि मोबाइल बरामदगी के बाद टेक्निकल टीम मधेपुरा व सहरसा तथा सदर थाना सहरसा के पदाधिकारी व कर्मियों द्वारा बिना सत्यापन के वरीय पदाधिकारी की अनुमति के डीएसपी मुख्यालय को बदनाम करने के लिए उक्त महिला के बयान को मीडिया को लीक कर वायरल कर दिया गया.
महिला के बयान वाले वीडियो को सदर डीएसपी अजय नारायण यादव ने सिपाही धीरेंद्र से घर पर बुला कर सरकारी व निजी मोबाइल नंबर पर वीडियो को मंगवाया . जिसके बाद वीडियो वायरल होने का मामला सामने आया. जिसको लेकर सदर एसडीपीओ अजय नारायण चौधरी पर विभागीय कार्रवाई के साथ पद से हटाने को लेकर अनुशंसा की गयी है.
Published By: Thakur Shaktilochan
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