श्रीकिशुन पंचायत में सरकार भवन के स्थल चयन पर विवाद: ग्रामीणों ने कहा- जंगल-पहाड़ के पास नहीं, मुख्य आबादी में बने भवन

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पहाड़ से सटे स्थल जहां बनना है श्रीकिशुन पंचायत सरकार | Prabhat Khabar Network

Panchayat Sarkar Bhavan: ग्रामीणों ने सरकारी भवन निर्माण के लिए जंगल और पहाड़ की तलहटी में स्थल चयन का कड़ा विरोध किया है. उनका आरोप है कि मुख्य आबादी से दूर होने के कारण लोगों को सुविधाओं का लाभ नहीं मिलेगा. मामले की जांच जिलाधिकारी ने शुरू की है.

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Panchayat Sarkar Bhavan: ग्रामीणों का आरोप है कि मुख्य आबादी वाले क्षेत्र में पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध होने के बावजूद, भवन का निर्माण जानबूझकर पहाड़ की तलहटी और जंगल से सटे सुदूर इलाके में प्रस्तावित किया गया है. इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी (DM) शैलेंद्र कुमार को एक लिखित आवेदन सौंपकर गुहार लगाई है, जिसके बाद जिलाधिकारी ने मामले की नियमानुसार निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिया है.

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पहाड़ और जंगल के पास चयन से आवाजाही में होगी भारी परेशानी

ग्रामीणों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का तर्क है कि पंचायत सरकार भवन का मुख्य उद्देश्य आम जनता को एक ही छत के नीचे सभी सरकारी सुविधाएं सुलभ कराना होता है. चूंकि वर्तमान चयनित स्थल पहाड़ की तलहटी और घने जंगल के करीब है, इसलिए वहां आम लोगों और विशेषकर महिलाओं व बुजुर्गों की आवाजाही न के बराबर होगी. दुर्गम रास्ता होने के कारण लोगों को अपने छोटे-छोटे ब्लॉक और पंचायत स्तर के कार्यों के लिए भटकना पड़ेगा, जिससे अंततः सरकारी धन और योजना दोनों का दुरुपयोग साबित होगा.

पूर्व डीएम ने भी लगा दी थी रोक, नरोत्तमपुर के पास जमीन का विकल्प

यह कोई पहला मौका नहीं है जब इस स्थल को लेकर विरोध हुआ है. ग्रामीणों के अनुसार:

  • पूर्व में लगी रोक: तत्कालीन जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र के कार्यकाल में भी इसी विवादित स्थल पर निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई थी. तब भी यह सवाल उठा था कि जंगल के मुहाने पर अधिकारी और फरियादी कैसे पहुंचेंगे.
  • जमीन का बेहतर विकल्प: ग्रामीणों का दावा है कि नरोत्तमपुर और श्रीघना गांव के बीच मुख्य सड़क और आबादी के पास सरकार की कई एकड़ उपजाऊ व समतल भूमि खाली पड़ी है. यदि वहां भवन बनता है, तो वह पंचायत का केंद्र (मुख्यालय) होगा और सभी राजस्व ग्रामों के लोगों की पहुंच बेहद आसान हो जाएगी.

मुखिया प्रतिनिधि ने उठाए सवाल: सुलभ सेवा देना है मुख्य उद्देश्य

इस विरोध को पंचायत के जनप्रतिनिधियों का भी पूरा समर्थन मिल रहा है. मुखिया प्रतिनिधि अशोक पासवान ने वर्तमान चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा, "बाजार और मुख्य आबादी से महज एक से दो किलोमीटर के दायरे में कई एकड़ सरकारी जमीनें मौजूद हैं. उन्हें दरकिनार कर इस महत्वपूर्ण भवन को पहाड़ की तलहटी में ले जाना किसी भी दृष्टिकोण से न्यायसंगत नहीं है. दुर्गम स्थान पर भवन बनने से जनता परेशान होगी." उन्होंने मांग की है कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए स्थल का पुनर्मूल्यांकन किया जाए.

बोले जिलाधिकारी: आवेदन मिला है, नियमानुसार कराएंगे जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए जब लखीसराय के जिला पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की ओर से एक आवेदन प्राप्त हुआ है.

"स्थल विवाद को लेकर ग्रामीणों का आवेदन आज ही कार्यालय को मिला है. इस पूरे मामले की नियमानुसार और विधिवत तकनीकी व प्रशासनिक जांच कराई जाएगी. चूंकि आवेदन अभी प्राप्त हुआ है, इसलिए तुरंत मौके पर टीम नहीं जाएगी, लेकिन जांच रिपोर्ट में यदि ग्रामीणों की आपत्तियां और मानक सही पाए गए, तो स्थल चयन पर निश्चित रूप से पुनर्विचार किया जाएगा." — शैलेंद्र कुमार, जिलाधिकारी (लखीसराय)

फिलहाल जिला प्रशासन की आगामी जांच और उस पर आने वाले फैसले पर पूरी पंचायत के लोगों की नजरें टिकी हुई हैं. ग्रामीण इस बात पर अड़े हैं कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और फैसला पंचायत के सामूहिक हित में लिया जाए.


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