किऊल नदी का जलस्तर बढ़ने से निस्ता तटबंध पर बढ़ा खतरा, गुणवत्ता पर उठे सवाल

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निस्ता गांव में सुरक्षा तटबंध को खतरा, बचाव की तैयारी में जुटा प्रशासन

निस्ता गांव में सेंड बैग डालकर सुरक्षा तटबोध को बचाने की तैयारी

सूर्यगढ़ा के निस्ता गांव में किऊल नदी के बढ़ते जलस्तर से तटबंध को खतरा। ग्रामीणों ने गुणवत्ता पर उठाए सवाल, प्रशासन ने शुरू की बचाव की तैयारी।

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सूर्यगढ़ा (लखीसराय). किऊल नदी में जलस्तर बढ़ने के साथ ही सूर्यगढ़ा प्रखंड की टोरलपुर पंचायत के वार्ड संख्या-11 स्थित निस्ता गांव के सुरक्षा तटबंध पर खतरे की आशंका बढ़ गई है. प्रशासन की ओर से तटबंध की सुरक्षा के लिए सैंड बैग डालने का कार्य शुरू किया गया है, लेकिन इसकी मजबूती को लेकर ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है.

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते तटबंध को स्थायी रूप से मजबूत नहीं किया गया तो बाढ़ के दौरान करीब 10 हजार की आबादी प्रभावित हो सकती है.

हर साल बाढ़ में सक्रियता, बाद में भूल जाता है विभाग

ग्रामीणों का आरोप है कि हर वर्ष बाढ़ के समय प्रशासन और जल संसाधन विभाग तटबंध बचाने के लिए सक्रिय हो जाता है. रातभर जनरेटर की रोशनी में कटाव निरोधी कार्य कराया जाता है और अधिकारी तथा जनप्रतिनिधि निरीक्षण भी करते हैं, लेकिन बाढ़ का पानी उतरते ही तटबंध के स्थायी सुदृढ़ीकरण की योजना ठंडे बस्ते में चली जाती है.

ईसी बैग में मिट्टी भरने का आरोप

ग्रामीण कंपनी यादव ने आरोप लगाया कि तटबंध की सुरक्षा के लिए रखे गए ईसी बैग में बालू के बजाय केवल मिट्टी भरकर स्टॉक किया गया है. वहीं संजय यादव का कहना है कि बाढ़ आने पर यहां रखे गए बैग दूसरे स्थानों पर भेज दिए जाते हैं और तटबंध की सुरक्षा ग्रामीणों के भरोसे छोड़ दी जाती है.

पूर्व सरपंच ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

पूर्व सरपंच विजय यादव ने आरोप लगाया कि संवेदक जानबूझकर समय रहते ईसी बैग तटबंध पर नहीं लगाते, ताकि उनकी वास्तविक संख्या का मिलान नहीं हो सके. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई बार खाली ईसी बैग भी गायब कर दिए जाते हैं और बाढ़ के दौरान पानी में लगे बैगों की गिनती संभव नहीं होने का लाभ उठाकर फर्जी तरीके से राशि निकासी की जाती है. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.

शिकायत सही मिली तो होगी कार्रवाई : कनीय अभियंता

जल संसाधन विभाग के कनीय अभियंता राकेश कुमार ने बताया कि ईसी बैग में तटबंध से आधा किलोमीटर के दायरे में उपलब्ध बालू अथवा बालू मिश्रित मिट्टी ही भरी जाती है. विभाग निर्धारित संख्या में बैग उपलब्ध कराता है और उपयोग किए गए बैगों के आधार पर बैग भराई, सिलाई तथा तटबंध पर लगाने का प्राक्कलन तैयार किया जाता है.

उन्होंने कहा कि यदि केवल मिट्टी भरने या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता की शिकायत जांच में सही पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

स्थायी मरम्मत की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मानसून के दौरान तटबंध की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराने, स्थायी मरम्मत कराने तथा आवश्यक सुरक्षा कार्य जल्द शुरू करने की मांग की है. उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बाढ़ के समय बड़ा नुकसान हो सकता है.

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राजेश गुप्ता

लेखक के बारे में

By राजेश गुप्ता

राजेश गुप्ता प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सूर्यगढ़ा (लखीसराय) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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