सूर्यगढ़ा के निस्ता गांव में अधूरा नाला बना मुसीबत: खेतों को जोड़ने वाली मुख्य पीसीसी सड़क जलमग्न

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अधूरा नाला बना ग्रामीणों की मुसीबत, जलजमाव से परेशानी

फोटो कैप्शन: निस्ता गांव में जल जमाव से परेशानी | Prabhat Khabar Network

लखीसराय के निस्ता गांव में अधूरे नाले के निर्माण के कारण ग्रामीणों को मानसून की बारिश में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. खेतों को जोड़ने वाली मुख्य सड़क जलमग्न है और लोगों का जीवन मुश्किल हो गया है. जमीन विवाद के कारण विकास कार्य अटका हुआ है.

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लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा प्रखंड अंतर्गत टोड़लपुर पंचायत के निस्ता गांव में प्रशासनिक और सामाजिक तालमेल की कमी का खामियाजा आम ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है. गांव के वार्ड संख्या-11 सहित आस-पास के चार वार्डों में नाले का निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिए जाने से मॉनसून की शुरुआती बारिश में ही खेतों को जोड़ने वाला मुख्य पीसीसी (PCC) संपर्क मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया है.

8 महीने पहले शुरू हुआ था काम, सिर्फ 30% बनकर छूटा

जलजमाव की समस्या से जूझ रहे स्थानीय ग्रामीणों ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अपनी परेशानियां साझा की हैं:

  • आधा-अधूरा निर्माण: ग्रामीण विनय कुमार ने बताया कि लगभग आठ महीने पहले इस नाले का निर्माण कार्य जोर-शोर से शुरू किया गया था. परंतु, महज 30 प्रतिशत काम होने के बाद ठेकेदार द्वारा काम बंद कर दिया गया. यदि समय पर नाला बन जाता तो आज सैकड़ों ग्रामीणों को इस नारकीय स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता.
  • फिसलन से बढ़ा खतरा: नाले की खुदाई के दौरान किनारे पर निकाली गई काली मिट्टी को वैसे ही छोड़ दिया गया है. हल्की बारिश होते ही यह मिट्टी बेहद फिसलन भरी हो जाती है, जिससे इस मार्ग पर पैदल चलना या मवेशियों को ले जाना जानलेवा जोखिम बन गया है.

घरों को ऊंचा करने से नीची हुई सड़क

एक अन्य ग्रामीण कंपनी यादव ने समस्या के व्यावहारिक पहलू को उजागर करते हुए कहा कि केवल सड़क या नाला बना देना ही जलजमाव का स्थायी समाधान नहीं है. समय के साथ ग्रामीण अपने घरों के सामने मिट्टी भरकर मकानों को सड़क के स्तर से काफी ऊंचा कर लेते हैं. इस कारण मुख्य सड़क स्वतः नीची हो जाती है और पूरी आबादी के घरों और बारिश का पानी इसी मार्ग पर आकर जमा होने लगता है. इसके लिए एक मुकम्मल जलनिकासी योजना (ड्रेनेज प्लान) की आवश्यकता है.

जमीन विवाद में अटका है विकास कार्य

जलजमाव और अधूरे नाले की इस विकट समस्या को लेकर जब स्थानीय जनप्रतिनिधि से बात की गई, तो उन्होंने इसके पीछे विभागीय लापरवाही के बजाय आपसी मतभेद को मुख्य वजह बताया:

"निस्ता गांव में नाला निर्माण का कार्य किसी विभाग या संवेदक (ठेकेदार) की लापरवाही के कारण नहीं रुका है. हकीकत यह है कि नाले के लिए चिह्नित सड़क की जमीन को लेकर ग्रामीणों के बीच ही आपसी विवाद उत्पन्न हो गया है. प्रशासन द्वारा भूमि की आधिकारिक मापी (अमीन द्वारा) भी कराई जा चुकी है, लेकिन कुछ स्थानीय लोगों द्वारा आपत्ति दर्ज कराए जाने के कारण कानूनी और व्यावहारिक तौर पर निर्माण कार्य को फिलहाल रोकना पड़ा है. जैसे ही ग्रामीणों के बीच आपसी सहमति बन जाती है, नाला निर्माण को तुरंत पूरा कर जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित कर दी जाएगी." — रवि राज, जिला परिषद सदस्य (Suryagarha)

फिलहाल खेतों में धान की बुआई और मवेशियों के लिए चारा लाने का सीजन होने के कारण किसानों की मुश्किलें चरम पर हैं. ग्रामीण अब अंचल प्रशासन से इस जमीन विवाद को जल्द से जल्द सुलझाने की गुहार लगा रहे हैं ताकि अटके हुए विकास कार्य को दोबारा शुरू किया जा सके.


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राजेश गुप्ता

लेखक के बारे में

By राजेश गुप्ता

राजेश गुप्ता प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सूर्यगढ़ा (लखीसराय) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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