एक और दशरथ मांझी का इंतजार कर रहा है कजरा का राजघाट कोल

Published by :Divyanshu Prashant
Published at :05 May 2026 1:07 PM (IST)
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एक और दशरथ मांझी का इंतजार कर रहा है कजरा का राजघाट कोल

पहाड़ से उतरते लोग

आजादी के 79 साल बाद भी एक और दशरथ मांझी जैसे मांउटेनमैन का इंतजार कजरा थाना क्षेत्र के राजघाट कोल व कानीमोह, शीतलाकोड़ासी, घोघरघाटी जैसे कई अन्य गांव के निवासी कर रहे हैं. इसके अलावे कई और गांव है जो पहाड़ों के इन सुंदर वादियों के बीच बसा है. जो सरकार द्वारा मिल रहे लाभ से आज भी वंचित है.

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कजरा(लखीसराय) से सुनील कुमार की रिपोर्ट: आजादी के 79 साल बाद भी एक और दशरथ मांझी जैसे मांउटेनमैन का इंतजार कजरा थाना क्षेत्र के राजघाट कोल व कानीमोह, शीतलाकोड़ासी, घोघरघाटी जैसे कई अन्य गांव के निवासी कर रहे हैं. इसके अलावे कई और गांव है जो पहाड़ों के इन सुंदर वादियों के बीच बसा है. जो सरकार द्वारा मिल रहे लाभ से आज भी वंचित है. ये वो गांव हैं जहां आज भी बीमार पड़ने पर खाट पर सुला कर पहाड़ के उंचाई पर चढ़ कर उतरना पड़ता है. कुल मिलाकर कहे तो लगभग चार किलोमीटर का सफर तय करना होता है. जिससे अगर पहाड़ पर यदि रोड बना दिया जाये तो यही रास्ता महज बहुत ज्यादा तो एक किलोमीटर में तब्दील हो जायेगा. जिससे लोग को आने-जाने से लेकर जीवन यापन में काफी आसानी होगा. राजघाट कोल पहाड़ पर वर्तमान समय में ट्रैक्टर का आवागमन होता है, लेकिन उसी सड़क को थोड़ा सुविधायुक्त बना दिया जाये तो अन्य चार चक्का वाहन भी आसानी से आवागमन कर सकता है, जिससे उन ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को फायदा पहुंच जायेगा जो इस मार्ग से आवागमन पैदल ही करते हैं. इसके साथ ही नक्सल प्रभावित इलाका होने की वजह से पुलिस प्रशासन को ऑपरेशन चलाने में सुविधा होगी. ऑपरेशन के दौरान वाहनों से सीधे पहाड़ों के बीच आराम से पुलिस व सुरक्षा बलों के जवान आवागमन कर सकते हैं.

पहाड़ों के बीच रहने वाले मूलभूत सुविधाओ से आज भी हैं वंचित

पहाड़ों के बीच रहने वाले लोग आज भी लोग मूलभूत सुविधाओ से भी वंचित है. जैसे पीने का स्वच्छ पानी, डॉक्टर, सड़क, रहने को घर के अलावे कई और भी साधनों से वंचित है. आज भी यहां रह रहे लोग पीने का पानी का उपयोग पहाड़ से गिरने वाला झड़ना से करते आ रहे है. वही सरकार द्वारा कई जगह चापानल भी लगाया गया है परंतु भीषण गर्मी में यह फेल हो जाता है जिससे ग्रामीणों को पानी का काफी परेशानी हो जाता है. कपड़े धोने व बरतन धोने के लिए नदी में जमा पानी का उपयोग करते है.
इन सब के अलावे महत्वपूर्ण है चिकित्सा की सुविधा का घोर अभाव है. अगर क्षेत्र में कोई बिमार पड़ा तो 7 से 8 किलोमीटर दूर से क्षोलाछाप डॉक्टर ही इनके भगवान है. अगर उनसे भी नही संभला तो खाट पर टांग कर पैदल चलकर या कंधों पर उठाकर बीमार लोगों का इलाज कराने के लिए डॉक्टर के पास 20 किलोमीटर दूर सूर्यगढ़ा या 35 किलोमीटर दूर लखीसराय लेकर जाना होता है. कई बार तो ऐसे में अनहोनी भी हो जाती है. डॉक्टर के पास पहुंचने से पहले ही बीमार लोगो की जान चली जाती है. वजह है आसपास डॉक्टर का नहीं होना एवं सही समय पर डॉक्टर के पास नही पहुंच पाना.

क्षेत्रवासी, जिलाधिकारी व क्षेत्रीय नेतागण से विकास की लगाये हैं उम्मीद

क्षेत्रवासियों का कहना है कि गरीबी में जी रहे लोगों के भगवान अब जिलाधिकारी व नेतागण है. अगर उन सब की प्रर्थाना सुन लें और चिकित्से तक पहुंचने के लिए रोड की व्यवस्था कर दे, तो पूरी जिंदगी उनके शुक्रगुजार रहेगें वे सब क्षेत्रवासी. वैसे नेतागण तो सिर्फ वोट के लिए ही आते है अगर विकास के लिए आये तो हमारा भी विकास होगा. वरना तो गरीबी में जिये और गरीबी में ही मरना लिखा है.

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