श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेनों में 'तत्काल' लूट! देवघर से लौटने में श्रद्धालुओं की जेब हो रही ढीली, 150 के सफर के वसूले जा रहे 400

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फोटो- रेल वन ऐप किराया का स्क्रीनशॉट | Prabhat Khabar Network

श्रावणी मेले के बाद बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक कर लौट रहे श्रद्धालुओं को रेलवे स्पेशल ट्रेनों के किराए से झटका लग रहा है. सामान्य किराए से तीन गुना अधिक किराया वसूले जाने से भक्तों में भारी रोष है. रेलवे ने इसे 'तत्काल श्रेणी' का किराया बताया है, लेकिन यात्रियों का कहना है कि बुकिंग से पहले इसकी जानकारी नहीं दी जाती.

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श्रावणी मेला के पावन अवसर पर, बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक कर लौट रहे श्रद्धालुओं की खुशियां, रेलवे के टिकट काउंटरों और मोबाइल ऐप पर पहुंचते ही काफूर हो जा रही हैं. देवघर से लौटने वाले भक्तों की भीड़ बढ़ते ही, स्पेशल ट्रेनों के किराए को लेकर यात्रियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है. आरोप है कि 'मेला स्पेशल' के नाम पर रेलवे सामान्य किराए से कई गुना अधिक किराया वसूल रहा है, जिससे गरीब भक्तों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. डिजिटल खबर फॉर्मेट में आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं.

रेल वन ऐप पर किराया देख उड़े यात्रियों के होश, दूरी कम पर दाम तीन गुना

बाबा धाम से पूजा कर, अपने परिवार के साथ लौट रहे यात्री राजीव मुरारी सिन्हा ने जब आरामदायक सफर के लिए 'रेल वन' (Rail One) ऐप खोला, तो वे किराए का आंकड़ा देखकर दंग रह गए. देवघर से जमालपुर की दूरी महज 162 किलोमीटर है, लेकिन इस दूरी के लिए ट्रेन संख्या 05546 (देवघर-रक्सौल श्रावणी मेला स्पेशल) में स्लीपर क्लास का किराया करीब 400 रुपये दिखाया जा रहा था. यात्रियों ने इसकी तुलना करते हुए बताया कि पटना से जमालपुर की दूरी लगभग 169 किलोमीटर है, लेकिन उस रूट पर सामान्य स्लीपर क्लास का किराया महज 150 रुपये है.

'श्रद्धालुओं की मजबूरी का फायदा उठा रहा है रेलवे' - भड़के यात्री

नाराज यात्रियों का कहना है कि श्रावणी मेले के दौरान, देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं. पूजा समाप्त होने के बाद, वापस लौटने के लिए यात्रियों के पास बेहद सीमित विकल्प होते हैं. ऐसे में स्पेशल ट्रेनों में इतना भारी किराया वसूलना, सीधे तौर पर श्रद्धालुओं की मजबूरी का फायदा उठाना है. यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि इस किराए की व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त किया जाए, और धार्मिक यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को राहत दी जाये.

रेलवे पीआरओ की सफाई: 'अधिक डिमांड के कारण ट्रेनों में लागू है तत्काल किराया'

इस बढ़ते विवाद को लेकर, जब पूर्व रेलवे के मालदा मंडल के पीआरओ (PRO) रसराज माजी से बात की गई, तो उन्होंने भी प्रारंभिक तौर पर किराए की राशि को अधिक माना. हालांकि, बाद में रेलवे की किराया नीति स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि भारी भीड़ और अत्यधिक मांग (High Demand) को देखते हुए, इन विशेष मेला स्पेशल ट्रेनों को तत्काल श्रेणी (Tatkal Category) के तहत रखा गया है. इसी कारण, इन स्पेशल ट्रेनों का किराया सामान्य ट्रेनों की तुलना में काफी ज्यादा है.

बुकिंग से पहले जानकारी न मिलने से बढ़ा सस्पेंस

रेलवे की इस 'तत्काल' दलील पर, यात्रियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं. उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि रेलवे किसी ट्रेन को 'मेला स्पेशल' या 'डिजमांड स्पेशल' घोषित कर अधिक किराया ले रहा है, तो इसकी स्पष्ट जानकारी टिकट बुकिंग से पहले यात्रियों को मिलनी चाहिए, ताकि अचानक टिकट बुक करते समय उन्हें झटका न लगे. श्रद्धालुओं का कहना है कि देश के सबसे बड़े धार्मिक मेलों में से एक 'श्रावणी मेला' में आने वाले भक्तों के लिए रेलवे को रियायती दर पर ट्रेनें चलानी चाहिए, न कि इसे कमाई का जरिया बनाना चाहिये.


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Sunil Kumar

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