डेढ़ साल बाद भी अधूरा बरियारपुर पंचायत सरकार भवन, घटिया ईंटों के इस्तेमाल का आरोप, सितंबर तक का लक्ष्य

अधूरा पंचायत सरकार भवन | Prabhat Khabar Network
लखीसराय जिले के पीरी बाजार क्षेत्र अंतर्गत बरियारपुर पंचायत सरकार भवन का निर्माण कार्य डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी अधर में लटका हुआ है. जनवरी 2025 में शुरू हुआ यह निर्माण कार्य जून 2026 बीतने के बावजूद पूरा नहीं हो सका है, जिसे लेकर पंचायतवासियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी है.
एक ही छत के नीचे सभी प्रशासनिक सेवाएं पाने की उम्मीद लगाए बैठे ग्रामीणों का इंतजार लंबा होता जा रहा है. भवन निर्माण में हो रही अत्यधिक देरी के साथ-साथ मुख्य प्रवेश द्वार के समीप घटिया किस्म की ईंटों के इस्तेमाल के आरोपों ने इस योजना को विवादों में ला दिया है. जहां एक ओर मुखिया ने निर्माण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, वहीं विभाग ने फंड की कमी का हवाला देते हुए सितंबर 2026 तक काम पूरा करने का नया दावा किया है.
एक परिसर में सरकारी सेवाओं का इंतजार, चक्कर काट रहे ग्रामीण
भवन निर्माण लटकने के कारण स्थानीय पंचायत वासियों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ रही है:
- समय और पैसे की बर्बादी: ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सरकार भवन का उद्देश्य एक ही परिसर में सभी योजनाएं और आरटीपीएस (RTPS) जैसी सेवाएं देना था. इसके न बनने से लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए अलग-अलग कार्यालयों की दौड़ लगानी पड़ रही है.
- मानकों की अनदेखी का आरोप: स्थानीय लोगों ने शिकायत की है कि भवन के मुख्य हिस्से में अत्यंत घटिया ईंटें लगाई जा रही हैं, जो सार्वजनिक और सरकारी भवनों के तय मानकों के सर्वथा विपरीत हैं.
मुखिया ने उठाए गंभीर सवाल: सूचना बोर्ड गायब, जांच रिपोर्ट ठंडे बस्ते में
बरियारपुर पंचायत के वर्तमान मुखिया अभिषेक राज उर्फ चुन्नू ने नगर पंचायत और विभागीय कार्यशैली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं:
- पारदर्शिता का अभाव: निर्माण स्थल पर अब तक योजना की कुल राशि, संवेदक का नाम और समयावधि से जुड़ा कोई भी आधिकारिक सूचना बोर्ड (साइन बोर्ड) नहीं लगाया गया है, जिससे योजना की जानकारी पूरी तरह गोपनीय बनी हुई है.
- तबादले के बाद दबा मामला: मुखिया ने बताया कि पूर्व जिलाधिकारी (DM) ने अपने निरीक्षण के दौरान खुद मौके से ईंट का नमूना (सैंपल) जब्त कर जांच के लिए भेजा था, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है.
राशि आवंटन में देरी से अटका काम, सितंबर के पहले सप्ताह का लक्ष्य: कार्यपालक अभियंता
इस पूरे विवाद, ईंट की गुणवत्ता और लेटलतीफी को लेकर भवन निर्माण विभाग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है:
"पूर्व जिलाधिकारी के निरीक्षण के समय जो ईंट का नमूना जांच के लिए संबंधित इंजीनियरिंग कॉलेज भेजा गया था, उसकी लैब रिपोर्ट पूरी तरह संतोषजनक आई थी. फिर भी यदि मुखिया या ग्रामीणों द्वारा दोबारा गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो विभाग बिना देरी किए फिर से एक तकनीकी जांच टीम मौके पर भेजेगा. निर्माण में हुई देरी का मुख्य कारण विभाग स्तर से राशि (फंड) आवंटन में विलंब होना था. अब राशि उपलब्ध हो चुकी है, इसलिए कार्य में तेजी लाई जाएगी. विभाग ने सितंबर 2026 के पहले सप्ताह तक हर हाल में भवन निर्माण पूरा करने का अंतिम लक्ष्य निर्धारित किया है." — कुणाल कुमार, कार्यपालक अभियंता, भवन निर्माण विभाग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि तय समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से भवन बनकर तैयार हो जाता है, तो ग्रामीणों को एक ही जगह सभी प्रशासनिक सुविधाएं मिलने लगेंगी, जिससे उन्हें प्रखंड मुख्यालय की लंबी दूरी तय करने से बड़ी राहत मिलेगी.
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By Prabhat Khabar News Desk
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