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चेचक का बढ़ रहा प्रकोप, रहें सावधान

सूर्यगढ़ा : इन दिनों चेचक बीमारी का प्रकोप सभी जगहों पर है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मौसम में चेचक का खतरा अधिक होता है, खासकर बच्चे इससे अधिक अक्रांत हो रहे हैं. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सत्येंद्र कुमार ने बताया कि गरमी शुरू होते ही चेचक के वायरस वातावरण में एक्टिव हो जाते हैं. […]

सूर्यगढ़ा : इन दिनों चेचक बीमारी का प्रकोप सभी जगहों पर है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मौसम में चेचक का खतरा अधिक होता है, खासकर बच्चे इससे अधिक अक्रांत हो रहे हैं. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सत्येंद्र कुमार ने बताया कि गरमी शुरू होते ही चेचक के वायरस वातावरण में एक्टिव हो जाते हैं. चेचक अधिकांश वैसे लोगों को होता है जिन्होंने बचपन में इसका टीका नहीं लगवाया है. चेचक वायरस ऐसे ही शरीर में प्रवेश कर जाते हैं.

बीमारी संक्रामक है, रहें सतर्क
चिकित्सकों का कहना है कि चेचक एक संक्रामक बीमारी है जिस घर में किसी बच्चे को यह बीमारी हो तो घर वाले उस बच्चे को दूसरे बच्चों के संपर्क से दूर रखें. 10 दिनों में जब घाव सूखने लगे तभी उसके आसपास जायें. इस दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें . क्योंकि गंदगी होने से शरीर से निकला वायरस पूरे घर में फैल जायेगा.
कई बार यह देखने को मिलता है कि घर में किसी को चेचक हुआ तो एक के बाद एक सभी को हो जाता है, संक्रमण व लापरवाही इसका मुख्य कारण है.
होमियोपैथिक में चेचक का इलाज
होमियोपैथ में चिकन पॉक्स का कारगर इलाज है. इस पद्धति में दवा के माध्यम से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा दिया जाता है, इससे मरीज को संक्रमति होने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है. होमियोपैथ में चिकन पॉक्स से बचने के लिए दवा भी दी जाती है, जिसका काफी लाभ होता है. बच्चे व परिवार के सदस्यों को गरमी शुरू होते ही दवा पिला देनी चाहिए.
महंगा होता है टीका, नहीं लेते लोग
चेचक के टीकाकरण का सरकारी तौर पर बेहतर इंतजाम नहीं है. प्राइवेट स्तर पर इसकी कीमत 15 सौ रुपये है. यही कारण है कि अधिकांश लोग अपने बच्चे को टीका नहीं लगवाते हैं, जबकि जन्म के एक साल के बाद ही चेचक का टीका लेना आवश्यक होता है. इससे बच्चा जीवन भर बीमारी से सुरक्षित हो जाता है.
प्रतिरोधक क्षमता कम हो, तो नुकसान
विशेषज्ञों के मुताबिक जिन्हें टीका लग चुका है उन्हें चेचक होने की संभावना कम होती है, लेकिन शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर चेचक हो सकता है. कई बार दूसरी बीमारियों की वजह से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है.
इन बातों का रखें ख्याल
धूप में निकलने से बचे
धूप में रहने के बाद प्यास लगने पर तुरंत पानी नहीं पीये
शरीर में दाना निकलने पर तुरंत चिकित्सक से मिले
इस मौसम में चिकन पॉक्स होने की संभावना अधिक होती है. लोग इलाज के लिए चिकित्सक के पास नहीं आते. घर में ही नेम-धर्म के साथ इलाज करते हैं. पिछले दिनों मानुचक बिंद टोली व अवगिल रामपुर गांव में चेचक होने की सूचना के बाद मेडिकल टीम भेजा गया था. आशा को निर्देश दिया गया कि कहीं भी चेचक से लोग पीड़ित हो तो सूची के साथ सूचना दें , ताकि हेल्थ टीम भेजकर उपचार किया जा सके.
डॉ सत्येंद्र कुमार, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी
Prabhat Khabar Digital Desk
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