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नोटबंदी को पक्ष ने सराहा, तो विपक्ष ने की आलोचना

महागठबंधन ने नोटबंदी को लेकर मनाया काला दिवस लखीसराय : राजद एवं कांग्रेस के नेताओं द्वारा बुधवार को स्थानीय केआरके मैदान में नोटबंदी के एक वर्ष पूरा होने के बाद काला दिवस मना कर रैली का आयोजन किया. मौके पर राजद विधायक प्रहृलाद यादव ने कहा कि नोटबंदी से गरीबों का नुकसान हुआ है. मोदी […]

महागठबंधन ने नोटबंदी को लेकर मनाया काला दिवस
लखीसराय : राजद एवं कांग्रेस के नेताओं द्वारा बुधवार को स्थानीय केआरके मैदान में नोटबंदी के एक वर्ष पूरा होने के बाद काला दिवस मना कर रैली का आयोजन किया. मौके पर राजद विधायक प्रहृलाद यादव ने कहा कि नोटबंदी से गरीबों का नुकसान हुआ है. मोदी सरकार गरीब के साथ ठगी का काम किया है.उन्होंने कहा कि नोटबंदी से पैसों के अभाव में लोगों की मौत हुई है.
पैसा उपलब्ध होते हुए भी कई घरों में अनिवार्य कार्य भी रुक गया. सरकार द्वारा विदेश सेकाला धन नोटबंदी के बाद आने की बात कही गयी, लेकिन काला धन वापस नहीं हुआ. कांग्रेस के जिलाध्यक्ष प्रभात कुमार ने कहा कि मोदी सरकार नोटबंदी एवं जीएसटी लागू कर गरीबों पर ही प्रहार किया है़ इसके चलते अमीरों को तो नहीं बल्कि गरीबों को काफी परेशानी उठानी पड़ी. नोटबंदी के बाद जिनके भी घरों में थोड़ी बहुत राशि जमा थी उसे भी निकाल लिया गया़ कई परिवारों में नोटबंदी के बाद नगद राशि नहीं रहने की वजह से शादी तक रूक गयी
उन्होंने कहा कि इससे सिर्फ अमीरों को फायदा पहुंचा़ कांग्रेस नेता सुनील कुमार ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि नोटबंदी एवं जीएसटी लागू होने से हर तबके के लोगों को नुकसान हुआ है. राजद के प्रखंड अध्यक्ष मो इरफान ने कहा कि नोटबंदी से लोगों की नुकसान का भरपाई सालों तक नहीं हो सकता है.सभा को कांग्रेस के जिलाध्यक्ष प्रभात कुमार, सुनील कुमार, राजद महासचिव नरेश कुमार, कांग्रेस के शत्रुधन सिंह, अर्जुन सिंह, रामाकांत सिंह प्रेमी, राजद जिला प्रवक्ता भगवान यादव, नजीर बेग सहित कई नेताओं ने भी संबोधित किया. नोटबंदी के एक वर्ष पूरे होने पर श्रमिक आंदोलन के नेता, एटक के राज्य कार्यकारिणी सदस्य, खेत मजदूर यूनियन के राज्य सचिव प्रमोद शर्मा, एटक के जिलाध्यक्ष सरिता कुमारी, आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन के जिला सचिव अर्चना कुमारी ,राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन के राज्य कमेटी सदस्य ममता कुमारी, नूतन कुमारी ने संयुक्त बयान जारी कर नोटबंदी, जीएसटी , श्रम कानून को मोदी सरकार के मजदूरों के खिलाफ कदम बताया है.
श्री शर्मा ने कहा कि सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी की रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी के बाद 2017 के जनवरी से अप्रैल के बीच तकरीबन 15 लाख नौकरियां समाप्त हो गयी. देश में किसी भी मजदूरों का इसके बाद भी सरकार के सातवें वेतन आयेग के अनुशंसा के तहत 18 हजार रुपये न्यूनतम मानदेय या वेतन का नीति को लागू किया जा सका.
देश में छोटे मंझोले व्यापारियों का काम प्रभावित हुआ. दुनिया के बाजार में पेट्रोल का दाम कम होने पर भी यह सरकार अपने धाटा को पाटने के नाम पर इनके सरकार बनने पर 50 रूपया लीटर से 80 रूपया लीटर तक पहुंचा दिया. उन्होंने कहा कि आज इसलिये देश के सभी श्रमिक संगठन 12 सूत्री मांग को लेकर 9-11 नवंबर को दिल्ली के संसद के सामने धरना देंगे तथा देश के मजदूरों की बात नहीं सुनी गयी तो देश मे फरवरी-मार्च महीना को सभी श्रमिक संगठनों की ओर से बेमियादी आम हड़ताल पहली बार करने के लिये मजबूर होगा.
Prabhat Khabar Digital Desk
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