प्रवासी पक्षियों के कलरव से गुलजार हुआ भागलपुर का यह झील, मनोरम दृश्य को देखने दूर-दूर से पहुंच रहे लोग

Published at :26 Dec 2022 6:56 AM (IST)
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प्रवासी पक्षियों के कलरव से गुलजार हुआ भागलपुर का यह झील, मनोरम दृश्य को देखने दूर-दूर से पहुंच रहे लोग

भागलपुर के सिंहपुर पश्चिम पंचायत के मौजमा-गनौल रेलवे लाईन से सटे झील में प्रवासी पक्षियों की कलरव से गुलजार हो रहा है. यहां फुलवस विसलिंग डक समेत कुल 37 जलीय पक्षी प्रजातियां देखी गई. पक्षियों के झुंड को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं.

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भागलपुर: नारायणपुर प्रखंड के सिंहपुर पश्चिम पंचायत के मौजमा – गनौल रेलवे लाईन से सटे झील में प्रवासी पक्षियों की कलरव से गुलजार हो रहा है. यहां फुलवस विसलिंग डक, नॉर्दर्न शोवलर, ओरिएंटल डार्टर, यूरेशियन मूरहेन, कॉमन किंग फिशर, यूरेशियन कूट, पाइड किंग फिशर, लिटिल कॉरमोरेंट, लेसर एडजुटेंट, बूटेड इगल और आस्प्रे समेत कुल 37 जलीय पक्षी प्रजातियां देखी गई.

प्रवासी और अप्रवासी पक्षियों की बहुलता

इस क्षेत्र के पक्षी विशेषज्ञ ज्ञान चंद्र ज्ञानी बताते हैं कि यहां प्रवासी और अप्रवासी पक्षियों की बहुलता है. ज्ञानी पिछले कई सालों से पक्षियों की गणना करते आ रहे हैं. उनके अनुसार भागलपुर समेत बिहार कई इलाकों में प्रवासी और अन्य पक्षियों का शिकार और व्यापार होता आया है जिसपर लगाम लगाना अत्यंत आवश्यक है.हालांकि पिछले कुछ सालों की तुलना में वनविभाग की सक्रियता से पक्षियों के शिकार में थोड़ी बहुत कमी आई है .पक्षियों के संरक्षण का उद्देश्य पूर्ण करने के लिए सभी पक्षों को ध्यान में रखना अनिवार्य है.

कहां से आते हैं पक्षी

यहां प्रवासी पक्षी रुस, मंगोलिया व अन्य देशों से ठंड के मौसम में यहां आते है मार्च महीने में ये पुनः वापस चले जाते हैं. इन में से कुछ पक्षी भारत में प्रजनन करते हैं तो कुछ चारागाह की तलाश में आते हैं.स्थानीय पक्षी अनुकूल परिस्थिति में यहां रहते हैं.

क्या कहते हैं पक्षी विशेषज्ञ

‘सामाजिक और – विभागीय स्तर पर इसे संरक्षित करने की जरूरत है.झील के रूप में विकसित होने पर पर्यटन की संभावना के साथ साथ पक्षियों के सरंक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा’

जलाशय के आस पास छोटे फलदार पौधे की जरूरत

इस जलाशय के आस पास छोटे फलदार पौधे भी पक्षियों की संख्या और प्रजातियों के संरक्षण में सहायक सिद्ध हो सकती है. आस पास की आबादी को पक्षी संरक्षण के प्रति जागृत करने की आवश्यकता है.

लगभग चार एकड़ का क्षेत्र

ग्रामीण गोविंद राम बताते है कि लगभग चार एकड़ का क्षेत्र है. पानी होने से क्षेत्र को स्थानीय लोग बक्की नाम बोलते हैं. बर्ड गाइड व बंबु आर्टिस्ट चंदन कुमार, राजकिशोर कुमार, अभिषेक सिंह जीतू, गंगा प्रहरी दीप राजन, सूरज कुमार, दिलीप राम ने पक्षी विशेषज्ञ के साथ बर्ड वाचिंग किया.

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