सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन पर संकट! मई से अटका वेंडरों का भुगतान, जेब से खर्च करने को मजबूर शिक्षक

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मध्याह्न भोजन करते स्कूली बच्चे | Prabhat Khabar Network

बिहार के ठाकुरगंज प्रखंड में मध्याह्न भोजन योजना भुगतान में देरी से गंभीर संकट पैदा हो गया है. मई 2026 से वेंडरों का भुगतान अटका है, जिससे शिक्षकों को अपनी जेब से एलपीजी, अंडे और फल खरीदने पड़ रहे हैं. नई डिजिटल प्रणाली CFMS के लागू होने में हो रही देरी ने स्थिति और बिगाड़ दी है, जिससे बच्चों के पौष्टिक भोजन पर खतरा मंडरा रहा है.

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बिहार के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत सरकारी विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन (MDM) योजना पर भुगतान में देरी का गंभीर असर दिखने लगा है. मई 2026 से ही वेंडरों और संबंधित मदों का भुगतान लंबित होने के कारण स्कूल प्रबंधन के सामने बच्चों को रोजाना पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती बन गया है. भुगतान प्रणाली में बदलाव के बीच महीनों से बकाया न मिलने के कारण अब राशन दुकानदार भी हाथ खड़े करने लगे हैं.

PFMS और CFMS के फेर में फंसा भुगतान

जानकारों के अनुसार, पहले मध्याह्न भोजन का भुगतान पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) के जरिए किया जाता था.

  • व्यवस्था में बदलाव: अब विभाग की ओर से कॉम्प्रिहेंसिव फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (CFMS) के तहत डिजिटल भुगतान की नई व्यवस्था लागू की जा रही है.
  • असमंजस की स्थिति: इस नई व्यवस्था के ट्रांजिशन (बदलाव) के बीच मई 2026 से ही वेंडरों का भुगतान पूरी तरह अटका हुआ है, जिससे विद्यालय स्तर पर भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

उधार के राशन पर टिका बच्चों का निवाला, दुकानदार बना रहे दबाव

नियमों के तहत वेंडरों का भुगतान लंबित रहने के बावजूद किसी भी परिस्थिति में स्कूलों में बच्चों का मध्याह्न भोजन बंद नहीं किया जा सकता:

  • दुकानदारों का दबाव: कई विद्यालयों में स्थानीय किराना दुकानदार महीनों से उधार में सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं. लेकिन अब लाखों का बकाया बढ़ जाने से वे भुगतान के लिए दबाव बनाने लगे हैं.
  • आपूर्ति ठप होने का डर: यदि विभाग ने जल्द ही बकाया राशि जारी नहीं की, तो राशन और अन्य खाद्य सामग्रियों की आपूर्ति कभी भी ठप हो सकती है.

एलपीजी, अंडा और फल के लिए जेब से पैसे लगा रहे हेडमास्टर

मध्याह्न भोजन के दैनिक संचालन के लिए एलपीजी गैस सिलेंडर, अंडा, मौसमी फल और हरी सब्जियों की खरीद तुरंत नकद भुगतान पर करनी पड़ती है:

  • आर्थिक तंगी में शिक्षक: वेंडर भुगतान न होने की स्थिति में प्रधानाध्यापकों (हेडमास्टरों) और MDM प्रभारी शिक्षकों को अपनी निजी जेब से पैसे लगाने पड़ रहे हैं.
  • बढ़ता मानसिक दबाव: निजी खर्च के सहारे महीनों से योजना चलाने के कारण शिक्षकों पर भारी आर्थिक और मानसिक बोझ बढ़ रहा है.

डिजिटल पारदर्शिता जरूरी, लेकिन पहले जारी हो बकाया राशि

शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधनों का कहना है कि भुगतान प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए CFMS लागू करना सराहनीय कदम है, लेकिन इसकी आड़ में पुराना भुगतान महीनों तक लटकाए रखना गलत है. शिक्षकों की मांग है कि शिक्षा विभाग तुरंत हस्तक्षेप कर मई से लंबित सभी बकायों का भुगतान जारी करे और नई व्यवस्था को पूरी तरह स्पष्ट रूप से लागू करे, ताकि बच्चों का निवाला संकट में न पड़े.


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बच्छराज

लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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