अहिंसा, संयम व करुणा के संदेश से संतों ने दिखायी नयी राह

Updated at : 22 Mar 2026 6:41 PM (IST)
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अहिंसा, संयम व करुणा के संदेश से संतों ने दिखायी नयी राह

अहिंसा, संयम व करुणा के संदेश से संतों ने दिखायी नयी राह

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एनएच 31 पर हुआ जैन मुनियों का ऐतिहासिक मिलन, भक्ति व अध्यात्म के रंग में डूबी नगरी

मुनिश्री डॉ ज्ञानेंद्र व मुनिश्री प्रशांत कुमार के सिंघाड़ों के संगम से वातावरण हुआ धर्ममय

ठाकुरगंज/इस्लामपुर. इस्लामपुर की पावन धरा उस समय पूर्णतः आध्यात्मिक व धर्ममय वातावरण में सराबोर हो गयी, जब जैन समाज के पूज्य संतों मुनिश्री डॉ ज्ञानेंद्र एवं मुनिश्री पदम कुमार के सिंघाड़े का मुनि प्रशांत कुमार एवं मुनि कुमुद कुमार के सिंघाड़े के साथ भव्य मिलन संपन्न हुआ. यह दुर्लभ व ऐतिहासिक क्षण न केवल जैन समाज, बल्कि समस्त नगर वासियों के लिए आस्था का केंद्र बन गया. एनएच 31 पर हुए इस आध्यात्मिक मिलन के साक्षी बनने के लिए किशनगंज, गुलाबबाग, सिलीगुड़ी, धुलाबाड़ी, भद्रपुर व ठाकुरगंज से भारी संख्या में श्रद्धालु इस्लामपुर पहुंचे थे. पूरा क्षेत्र ”जय जिनेंद्र” के जयघोष से गुंजायमान रहा.

सड़क पर मिलन के पश्चात मुख्य समारोह तेरापंथ भवन, इस्लामपुर में आयोजित किया गया. कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन मुनिश्री कुमुद कुमार ने किया. इस दौरान संतों के ओजस्वी प्रवचनों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया. मुनिश्री डॉ ज्ञानेंद्र ने जैन धर्म की गौरवशाली परंपरा व साधु जीवन की कठोर साधना पर प्रकाश डालते हुए इसे मानवता के लिए एक वैश्विक धरोहर बताया.

भौतिकवादी युग में संयम व संतोष की महत्ता

मुनिश्री प्रशांत कुमार व मुनिश्री कुमुद कुमार ने अपने संबोधन में वर्तमान समय की चुनौतियों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य भौतिक सुख-साधनों की अंधी दौड़ में मानसिक शांति खोता जा रहा है. ऐसे में जैन धर्म के मूल सिद्धांत-अहिंसा, संयम व संतोष-ही मानव जीवन को संतुलित व सुखी बनाने का एकमात्र सशक्त माध्यम हैं. उन्होंने इस मिलन की तुलना दो पवित्र नदियों के संगम से की, जो समाज को नयी दिशा प्रदान करेगा.

युवाओं को संस्कार व नैतिकता का दिया संदेश

वहीं, मुनिश्री पदम कुमार ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट किया कि जैन साधु का जीवन केवल व्यक्तिगत मुक्ति का मार्ग नहीं है, बल्कि यह समाज को अनुशासन व आत्मिक उन्नति की प्रेरणा देता है. उन्होंने विशेष रूप से युवाओं का आह्वान किया कि वे आधुनिक जीवनशैली के साथ-साथ अपनी भारतीय संस्कृति और धार्मिक मूल्यों को भी आत्मसात करें. इस भव्य आयोजन में जैन समाज के वरिष्ठजनों, महिलाओं व युवाओं की सक्रिय भागीदारी रही. श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर संतों के चरणों में शीश नवाया व आशीर्वाद प्राप्त किया. पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन, अटूट श्रद्धा व भक्ति का अनूठा समन्वय देखने को मिला, जिसने नगर में शांति व सौहार्द का सशक्त संचार किया.

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