किशनगंज.
आजादी के 80 साल बाद दिघलबैंक प्रखंड में ट्रेनों की सीटी तो गूंजी, लेकिन रेलवे के सौतेले व्यवहार ने स्थानीय लोगों के उत्साह को आक्रोश में बदल दिया है. तीन लाख की आबादी वाले इस सीमावर्ती प्रखंड में एकमात्र ”तुलसिया रेलवे हॉल्ट” अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. अब स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने सुर में सुर मिलाकर इसे पूर्ण स्टेशन का दर्जा देने की मांग बुलंद कर दी है. नेपाल सीमा से सटे इस सामरिक व व्यावसायिक क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यात्रियों की संख्या व क्षेत्र के महत्व को देखते हुए यह मांग पूरी तरह न्यायसंगत है.सुविधाओं का टोटा: न टिकट मिलता है, न बैठने की जगह
तुलसिया हॉल्ट पर प्रतिदिन यात्रियों का भारी हुजूम उमड़ता है. लोग शिक्षा, रोजगार व इलाज के लिए इसी पर निर्भर हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के नाम पर यहाँ शून्य है. आलम यह है कि टिकट काउंटर तक सुचारू रूप से नहीं चलता, जिसके कारण यात्रियों को बिना टिकट यात्रा करने पर मजबूर होना पड़ता है. चेकिंग के दौरान जुर्माना भरना पड़ता है. प्रतीक्षालय, शौचालय व पेयजल जैसी मूलभूत जरूरतें यहां सपना बनकर रह गयी हैं. स्थानीय निवासी विनोदानंद ठाकुर व पूर्व प्रमुख ब्रज मोहन झा ने कहा कि रेलवे प्रशासन यात्रियों से राजस्व तो चाहता है, लेकिन सुविधाएं देने के नाम पर मौन है.
रात होते ही पसर जाता है सन्नाटा, अंधेरे में डूबा रहता है हॉल्ट
हॉल्ट की बदहाली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां लगाए गए बिजली के बल्ब तक गायब हो चुके हैं. शाम ढलते ही पूरा परिसर अंधेरे के आगोश में समा जाता है, जिससे यात्रियों, विशेषकर महिलाओं व बुजुर्गों की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है. इसके अलावा, स्टेट हाईवे 99 से हॉल्ट की दूरी कम होने के बावजूद सीधा रास्ता न होने के कारण यात्रियों को दो से तीन किलोमीटर का चक्कर काटकर पहुंचना पड़ता है.
भेदभाव का आरोप : टेढ़ागाछ व ठाकुरगंज को तवज्जो, दिघलबैंक की अनदेखी
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी भारी नाराजगी है कि इसी रेल खंड पर टेढ़ागाछ प्रखंड में दो और ठाकुरगंज प्रखंड में तीन स्टेशन/हॉल्ट बनाए गए हैं, लेकिन दिघलबैंक जैसे बड़े प्रखंड में महज एक हॉल्ट देकर खानापूर्ति कर दी गयी है. तुलसिया पंचायत के वर्तमान मुखिया मो जैद अजीज व पूर्व मुखिया रिजवान अहमद ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से गुहार लगायी है कि इसे जल्द स्टेशन का दर्जा दिया जाये, ताकि अधिक ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित हो सके व किसानों को अपने कृषि उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में मदद मिले.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

