8 महीने में पूरा होना था सर्वे, 19 महीने बाद भी अधूरा, RTI ने खोली ठाकुरगंज-चतरहाट रेल प्रोजेक्ट की धीमी रफ्तार

ठाकुरगंज-चतरहाट रेल प्रोजेक्ट
Thakurganj Rail Project: रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिली, 4.55 करोड़ रुपये का ठेका भी जारी हुआ, लेकिन 8 महीने में पूरा होने वाला सर्वे 19 महीने बाद भी अधूरा है. RTI के जवाब ने ठाकुरगंज-चतरहाट रेल प्रोजेक्ट की रफ्तार पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर देरी क्यों हो रही है और इसका असर सीमांचल के लाखों लोगों पर क्या पड़ेगा?
ठाकुरगंज(किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Thakurganj Rail Project: सीमांचल और देश के सामरिक दृष्टि से अहम माने जाने वाले चिकन नेक कॉरिडोर में प्रस्तावित ठाकुरगंज-चतरहाट नई ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह किसी नई घोषणा की नहीं, बल्कि सूचना के अधिकार (RTI) से सामने आए उस खुलासे की है, जिसमें रेलवे ने खुद स्वीकार किया है कि फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) अब तक पूरा नहीं हुआ है. जबकि इस सर्वे को आठ महीने में पूरा किया जाना था. तय समय बीतने के करीब 19 महीने बाद भी परियोजना शुरुआती चरण में ही अटकी हुई है.
RTI में हुआ बड़ा खुलासा, रेलवे ने मानी देरी
सूचना के अधिकार के तहत मिले जवाब के अनुसार 7 जून 2024 को रेलवे बोर्ड ने 24.40 किलोमीटर लंबी ठाकुरगंज-चतरहाट नई ब्रॉडगेज रेल लाइन के फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी दी थी.
इसके बाद 5 दिसंबर 2024 को पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने पुणे की Monarch Surveyors & Engineering Consultants Ltd. को लगभग 4.55 करोड़ रुपये का कार्यादेश जारी किया. अनुबंध के अनुसार यह सर्वे आठ महीने के भीतर पूरा होना था.
लेकिन 26 जून 2026 को दिए गए RTI जवाब में रेलवे ने स्वीकार किया कि फाइनल लोकेशन सर्वे अभी भी प्रगति पर है और इसकी कंप्लीशन रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है.
सर्वे में देरी से पूरी परियोजना पर पड़ सकता है असर
रेल परियोजना का फाइनल लोकेशन सर्वे किसी भी नई रेल लाइन के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है. इसी सर्वे के आधार पर आगे भूमि अधिग्रहण, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), बजट स्वीकृति और निर्माण कार्य शुरू होता है.
ऐसे में सर्वे में हो रही देरी का सीधा असर पूरी परियोजना की समयसीमा पर पड़ सकता है. इसका मतलब है कि रेल लाइन निर्माण शुरू होने में भी और समय लग सकता है.
चिकन नेक कॉरिडोर के लिए अहम है यह परियोजना
ठाकुरगंज-चतरहाट रेल लाइन केवल स्थानीय लोगों की सुविधा से जुड़ी परियोजना नहीं है. यह देश के सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण चिकन नेक कॉरिडोर में रेल नेटवर्क को मजबूत करने की योजना का हिस्सा है.
इस क्षेत्र में बेहतर रेल संपर्क से सीमांचल के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी. साथ ही व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है.
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अन्य रणनीतिक परियोजनाओं का भी हुआ जिक्र
RTI से यह भी सामने आया कि ठाकुरगंज-चतरहाट रेल परियोजना के साथ फोर्ब्सगंज-लक्ष्मीपुर और कुमेदपुर-अंबारी फालाकाटा जैसी अन्य महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं के लिए भी सर्वे की स्वीकृति दी गई थी.
इससे स्पष्ट होता है कि सीमांचल क्षेत्र में रेल नेटवर्क विस्तार को लेकर कई योजनाएं एक साथ आगे बढ़ाई जा रही हैं.
Thakurganj Rail Project: अब रेलवे के सामने जवाबदेही का सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब रेलवे बोर्ड की मंजूरी, बजट और करोड़ों रुपये का कार्यादेश समय पर जारी हो चुका था, तो फिर सर्वे तय समय में पूरा क्यों नहीं हो सका.
स्थानीय लोगों की नजर अब रेलवे प्रशासन पर है. लोग जानना चाहते हैं कि देरी के लिए जिम्मेदार कौन है और इस बहुप्रतीक्षित परियोजना पर अगला कदम कब उठाया जाएगा.
रेलवे ने फिलहाल केवल इतना कहा है कि फाइनल लोकेशन सर्वे अभी जारी है. ऐसे में अब सभी की उम्मीद है कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी हो और परियोजना अगले चरण में आगे बढ़ सके.
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लेखक के बारे में
By प्रत्युष प्रशांत
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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