सीमांचल से गायब हो रहा सुरजापुरी आम, बाजारों में हिमसागर की बढ़ी मांग

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हिमसागर आम बेचते दुकानदार

Seemanchal Surjapuri Mango: स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि कुछ दशक पहले किशनगंज, ठाकुरगंज, पौआखाली, बहादुरगंज और आसपास के इलाकों में सुरजापुरी आम के हजारों पेड़ हुआ करते थे. गर्मियों के मौसम में गांव-गांव और बागानों में इसकी बहार देखने को मिलती थी. सीमांचल ही नहीं, बल्कि अन्य जिलों में भी इस आम की अच्छी मांग रहती थी.

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पौआखाली से रणविजय की रिपोर्ट:

Seemanchal Surjapuri Mango: एक समय सीमांचल की पहचान माने जाने वाले सुरजापुरी आम का अस्तित्व अब संकट में पड़ता नजर आ रहा है. कभी अपने खास स्वाद, सुगंध और मिठास के लिए प्रसिद्ध यह पारंपरिक आम अब धीरे-धीरे लोगों की थाली और बाजारों से गायब होता जा रहा है. वहीं इसकी जगह पश्चिम बंगाल से आने वाले हिमसागर आम ने स्थानीय बाजारों में मजबूत पकड़ बना ली है.

स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि कुछ दशक पहले किशनगंज, ठाकुरगंज, पौआखाली, बहादुरगंज और आसपास के इलाकों में सुरजापुरी आम के हजारों पेड़ हुआ करते थे. गर्मियों के मौसम में गांव-गांव और बागानों में इसकी बहार देखने को मिलती थी. सीमांचल ही नहीं, बल्कि अन्य जिलों में भी इस आम की अच्छी मांग रहती थी.

पर्यावरणीय बदलाव बना बड़ा कारण

विशेषज्ञों और किसानों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, बढ़ता तापमान, भूजल स्तर में गिरावट और पेड़ों की लगातार कटाई ने सुरजापुरी आम के अस्तित्व पर गंभीर खतरा पैदा कर दिया है. इसके अलावा नई पीढ़ी के किसान अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफे की उम्मीद में अन्य व्यावसायिक किस्मों की ओर रुख कर रहे हैं.

किसानों का कहना है कि पारंपरिक आम की इस किस्म के संरक्षण और नए पौधों के रोपण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने से इसकी संख्या लगातार घट रही है.

हिमसागर आम ने बनाई मजबूत पहचान

इधर स्थानीय बाजारों में पश्चिम बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद, हुगली और नादिया जिलों से आने वाले हिमसागर आम की मांग तेजी से बढ़ी है. बेहतर उपलब्धता, आकर्षक रंग और व्यापारिक संभावनाओं के कारण हिमसागर आम उपभोक्ताओं की पसंद बनता जा रहा है.

फल विक्रेताओं का कहना है कि सुरजापुरी आम की मांग आज भी मौजूद है, लेकिन पर्याप्त उत्पादन और उपलब्धता नहीं होने के कारण लोग हिमसागर आम खरीदने को मजबूर हैं.

संरक्षण नहीं हुआ तो खो जाएगी पहचान

स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि यदि समय रहते सुरजापुरी आम के संरक्षण, अनुसंधान और बड़े पैमाने पर पौधारोपण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां इस पारंपरिक स्वाद से पूरी तरह वंचित हो जाएंगी.

सामाजिक संगठनों और किसानों ने सरकार से विशेष संरक्षण योजना शुरू करने, नए पौधों के रोपण को बढ़ावा देने और सुरजापुरी आम को भौगोलिक पहचान दिलाने की दिशा में पहल करने की मांग की है.

सुरजापुरी आम केवल एक फल नहीं, बल्कि सीमांचल की सांस्कृतिक विरासत और पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे बचाना समय की जरूरत बन गया है.

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Shruti Kumari

लेखक के बारे में

By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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