किशनगंज: SBI आरसेटी में 10 दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण शुरू; नाबार्ड डीडीएम व निदेशक ने किया उद्घाटन
दीप प्रज्वलित करते मुख्य अतिथि व अन्य | Prabhat Khabar Network
किशनगंज स्थित एसबीआई आरसेटी में 10 दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ है. यह प्रशिक्षण ग्रामीण युवाओं और किसानों को कम लागत में अतिरिक्त आय कमाने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान करता है. नाबार्ड के सहयोग से इसमें वैज्ञानिक तकनीकें और बाजार की रणनीतियाँ सिखाई जाएंगी.
ग्रामीण युवाओं और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने तथा स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से किशनगंज स्थित एसबीआई ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) में 10 दिवसीय मशरूम कल्टीवेशन (मशरूम उत्पादन) प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया.
कार्यक्रम का संयुक्त उद्घाटन नाबार्ड किशनगंज के जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) पुष्कर चौधरी एवं एसबीआई आरसेटी के निदेशक सुबोध कुमार रॉय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया.
कम लागत और कम जगह में अतिरिक्त आय का बेहतरीन विकल्प: नाबार्ड डीडीएम
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए नाबार्ड के डीडीएम पुष्कर चौधरी ने कहा कि मशरूम की खेती आज के समय में छोटे और सीमांत किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है.
कम लागत, सीमित स्थान और घर के खाली कमरों में भी ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन आसानी से शुरू किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि नाबार्ड की विकास योजनाओं में ऑयस्टर मशरूम को सीमांत किसानों, ग्रामीण परिवारों और महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के लिए एक प्रमुख आजीविका गतिविधि के रूप में चिन्हित किया गया है. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण को केवल औपचारिकता न समझें, बल्कि इसे एक सफल कृषि-व्यवसाय के रूप में अपनाएं.
व्यावहारिक और वैज्ञानिक तकनीकों पर रहेगा जोर: निदेशक सुबोध कुमार रॉय
एसबीआई आरसेटी के निदेशक सुबोध कुमार रॉय ने प्रशिक्षणार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि संस्थान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण प्रतिभाओं को कौशल आधारित प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना है.
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से नियमित उपस्थिति बनाए रखने और विशेषज्ञों द्वारा बताए जा रहे हर तकनीकी पहलू को गंभीरता से सीखने का आग्रह किया.
10 दिनों में इन प्रमुख विषयों की मिलेगी ट्रेनिंग:
- जलवायु व स्थान चयन: मशरूम उत्पादन हेतु कमरे का तापमान और नमी (आर्द्रता) नियंत्रण.
- वैज्ञानिक प्रक्रिया: उच्च गुणवत्ता वाले स्पॉन (बीज) की पहचान और पुआल के जरिए रासायनिक/जैविक विधि से बेड तैयार करना.
- फसल प्रबंधन: कीट और विभिन्न फंगल रोगों से बचाव, दैनिक छिड़काव व उचित वेंटिलेशन.
- बाजार और मार्केटिंग: सही समय पर कटाई, सुरक्षित पैकेजिंग, ग्रेडिंग और स्थानीय बाजारों में बिक्री की रणनीति.
- वित्तीय सहायता: प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इकाई स्थापित करने के लिए बैंकों से आसान ऋण और मुद्रा लोन संबंधी मार्गदर्शन.
उद्घाटन अवसर पर ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर संस्थान के संकाय सदस्य और तकनीकी कर्मियों में अजमल यजदानी, सुभाष कुमार मंडल, रविन्द्र कुमार, पंकज कुमार, परवीन कुमार सहित आरसेटी के अन्य स्टाफ और जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए प्रशिक्षणार्थी मौजूद रहे.
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