ठाकुरगंज: अररिया-गलगलिया रेल लाइन के नाम पर बची जमीन की रजिस्ट्री पर भी रोक; परेशान रैयतों ने जिला भू-अर्जन पदाधिकारी से लगाई गुहार

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अररिया-गलगलिया नई रेल लाइन परियोजना के तहत किशनगंज में भूमि अधिग्रहण के बाद भी निबंधन कार्यालय ने शेष जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी है. इससे प्रभावित रैयत मुश्किल में हैं और उन्होंने प्रशासन से तत्काल रोक हटाने की मांग की है.

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अररिया-गलगलिया नई बड़ी रेल लाइन (New BG Rail Line) परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के बीच किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड में एक गंभीर प्रशासनिक पेंच सामने आया है.

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रेलवे परियोजना के लिए खेसरा के एक तय हिस्से का अधिग्रहण होने के बावजूद निबंधन (रजिस्ट्री) कार्यालय द्वारा पूरे खेसरा की शेष गैर-अधिग्रहित भूमि की खरीद-बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है. इसके चलते प्रभावित रैयत भारी असमंजस और आर्थिक संकट में हैं. इस समस्या के समाधान के लिए अब रैयतों ने जिला भू-अर्जन पदाधिकारी (DLAO), किशनगंज के समक्ष औपचारिक आवेदन देकर शेष जमीन से तत्काल रोक हटाने की मांग की है.

अधिग्रहण सीमित रकबे का, लेकिन पाबंदी पूरे खेसरा पर

प्रस्तुत आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, किशनगंज जिले के दो अलग-अलग गांवों के रैयतों ने संयुक्त रूप से यह गुहार लगाई है:

  • मो. फैजान आलम (पिता: मो. जैनेउद्दीन, साकिन: बेणोगांव, थाना: पौआखाली): इनकी जमीन मौजा तातपौआ (थाना संख्या 192, खाता संख्या 138, खेसरा संख्या 1599) में स्थित है. इस खेसरा की 54 डिसमिल भूमि रेलवे गाइड बांध परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई है.
  • सिराजुद्दीन (पिता: जहीरुद्दीन, साकिन: इटाहारी, थाना: सुखानी): इनकी जमीन खाता संख्या 247, खेसरा संख्या 1568 में दर्ज है, जहां इसी तरह का गतिरोध बना हुआ है.

रैयतों का सवाल: गैर-अधिग्रहित भूमि पर रोक क्यों?

आवेदक मो. फैजान आलम ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया है कि वे रेलवे परियोजना के लिए अधिग्रहित हिस्से को छोड़कर उसी खेसरा में बची हुई अपनी निजी जमीन की रजिस्ट्री करना चाहते हैं.

परंतु, निबंधन कार्यालय के सॉफ्टवेयर व रिकॉर्ड में पूरे खेसरा को ब्लॉक सूची में डाल दिए जाने के कारण वे अपनी ही वैध जमीन को न तो बेच पा रहे हैं और न ही किसी वित्तीय काम के लिए उपयोग कर पा रहे हैं. रैयतों का सीधा सवाल है कि सरकार जितनी भूमि का मुआवजा दे रही है, केवल उसी पर रोक लगे; बाकी बची पुश्तैनी जमीन के निबंधन पर तकनीकी अड़ंगा लगाना सरासर अन्याय है.

जिला भू-अर्जन कार्यालय ने बैठाई स्थलीय जांच

रैयतों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला भू-अर्जन कार्यालय, किशनगंज ने मामले में संज्ञान लिया है.

आवेदन को आगे की प्रशासनिक व तकनीकी कार्रवाई के लिए अग्रसारित करते हुए संबंधित अधिकारियों व अमीन को मौके पर जाकर विषय-वस्तु की स्थलीय जांच करने का निर्देश दिया गया है. विभाग ने स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है कि परियोजना के लिए वास्तविक अधिसूचित रकबा कितना है और शेष जमीन का विवरण क्या है.

अब सभी की नजरें प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं. सीमांचल की इस महत्वपूर्ण रेल लाइन परियोजना के बीच यदि वास्तविक रकबे को अलग कर शेष जमीन को निबंधन के लिए अविलंब अनब्लॉक नहीं किया गया, तो रैयतों के सामने अपनी ही जमीन पर अधिकार खोने जैसी नौबत बनी रहेगी.

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