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माघी पूर्णिमा पर कीचक वध स्थल पर लगने वाले मेले की तैयारी अंतिम चरण में

Updated at : 29 Jan 2026 10:27 PM (IST)
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माघी पूर्णिमा पर कीचक वध स्थल पर लगने वाले मेले की तैयारी अंतिम चरण में

माघी पूर्णिमा पर कीचक वध स्थल पर लगने वाले मेले की तैयारी अंतिम चरण में

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गलगलिया. एक फरवरी को माघी पूर्णिमा के मौके पर हर साल की तरह इस साल भी गलगलिया थाना क्षेत्र अंतर्गत भातगांव के निंबूगुड़ी गांव से महज तीन किमी पर स्थित नेपाल के झापा जिले के महेशपुर गांव में ऐतिहासिक कीचक वध स्थित है. वहां माघी पूर्णिमा के दिन मेले का आयोजन किया जाता है. इसकी तैयारी पूरी कर ली गयी है. नेपाल प्रशासन भी कोविड के सभी नियम का पालन करते हुए मेले का आयोजन को लेकर तैयारी में लगी है. एसएसबी के जवान स्थानीय प्रशासन भी इस मेले को लेकर अपने अपने स्तर से तैयारी पूरी कर रही है. इस मेले में लाखों की संख्या में बिहार, बंगाल, असम, भूटान व सिक्किम व नेपाल के झापा, मोरंग, सप्तरी जिलों से श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करने आते है. मान्यता है कि यहां पांडवों को एक वर्ष का अज्ञातवास गुजारना था. इसी दौरान मत्स्य देश के सेनापति कीचक का वध पांडव पुत्र भीम ने मल्य युद्ध के बाद इसी स्थान पर किया था.

भीम की कीचक वध की प्रतिमा

दोनों देशों के नागरिक हिन्दू रिति रिवाज से कीचक वध स्थली पर पहुंच कर पूजा अर्चना करते हैं. कहा जाता है कि सौ वर्ष पहले यह जगह स्थल घने जंगलों से घिरा हुआ था और साधू संत, ऋषि मुनियों का आगमन उक्त स्थान पर लगा रहता था. लोग बसंत पंचमी के दिन से माघ पूर्णिमा तक दस दिनों तक महाभारत कथा का पाठ किया जाता है.

पातालगंगा का अलग विशेष महत्व

कीचक वध क्षेत्र में स्थित पातालगंगा का भी एक अलग महत्व है. चबूतरानुमा पातालगंगा के समीप शुद्ध मन व तन से किचक वध नाम, सत्यदेवी पातालगंगा धाम का जयकारा लगाने से पानी उबलने लगता है. उत्खनन में मिले ऐतिहासिक अवशेष समय के साथ सब कुछ बदलने के बाद भी ठाकुरगंज, महेशपुर में पौराणिक अवशेष आज भी सुरक्षित है. पुरातत्व विभाग द्वारा अब तक यहां सात चरण में उत्खनन हो चुका है, जिसमें तबेला जैसी दिखने वाली 22 मीटर लंबा व 17 मीटर चौड़ा एक मंजिला भवन पाया गया था. साथ ही मिट्टी के बर्तन, मिट्टी के ईंट जैसा प्लेट (टायल्स), घोड़ा व हाथी के गले में पहनने वाली कई वस्तु, मिसाइल के आकार के मिट्टी का सामान, पत्थर की थाली, मिट्टी की सुराही, बाण, नाग की मूर्ति एवं लोहे की चाकू इत्यादि पाया गया है. साथ ही खपरैल के टुकड़े और कुछ हड्डियां भी मिलने की जानकारी मिली है.

कहते हैं मुखिया प्रतिनिधि

भातगांव पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि मुन्ना सिंह ने बताया कि इस मेले में जाने के लिए निंबूगुड़ी हो कर जाना पड़ता है. जिसमें श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. मेरे प्रयासों से इस वर्ष मेले में जाने वाले लोगों के लिए दिक्कतों का सामना ना करना पड़े इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है.

कहते हैं थानाध्यक्ष

थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने बताया कि थाना क्षेत्र से सटे नेपाल में हर वर्ष माघी पूर्णिमा के दिन मेला का आयोजन किया जाता है. हमारे द्वारा भी भारत क्षेत्र में पुलिस फोर्स की तैनाती कर दी जाती है और गश्ती लगातार की जाती है. साथ ही सीमा पर एसएसबी के जवान भी इस मेले को सफल बनाने में अपनी भागीदारी निभाते हैं.

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AWADHESH KUMAR

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By AWADHESH KUMAR

AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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