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पुराने वाहन के धुएं से फैल रहा प्रदूषण,नहीं होती है जांच

Updated at : 14 Oct 2025 8:42 PM (IST)
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पुराने वाहन के धुएं से फैल रहा प्रदूषण,नहीं होती है जांच

जिले में विभागीय स्तर पर प्रदूषण जांच के नाम पर केवल खानापूर्ती की जा रही है.जांच की व्यवस्था फेल हो जाने से जिले में वाहन मालिकों की चांदी कट रही है.

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किशनगंज.जिसके जिम्मे वाहनों के प्रदूषण की जांच की जिम्मेदारी हो और वही अपने कर्तव्य से मुंह मोड़ ले,तो किसी अन्य से क्या उम्मीद की जाए.प्रदूषण जांच के लिए लगाई गई मशीनें सीमित इलाकों तक ही सिमटी हुई है.और जिले में विभागीय स्तर पर प्रदूषण जांच के नाम पर केवल खानापूर्ती की जा रही है.जांच की व्यवस्था फेल हो जाने से जिले में वाहन मालिकों की चांदी कट रही है. खड़क पर खटारा वाहन वातावरण में जहर फैला रहे हैं.शहर के वातावरण को प्रदूषित करने में वाहनों की भूमिका काफी अहम है.वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं लोगों को बीमार कर रहा है. इन वाहनों से शहर कितना प्रदूषित हो रहा है, इसका फिक्र प्रदूषण विभाग से लेकर परिवहन विभाग तक को नहीं के बराबर है.केवल कागजी कार्रवाई करके लोगों को सचेत करने की जिम्मेदारी निभा रहे परिवहन विभाग भी अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह से मुंह मोड़ चुका है.

नतीजतन शहर में दमा,चर्मरोग और खांसी के मरीजों की संख्या में भी दिनों दिन इजाफा होता जा रहा है. ऐसा तब है जबकि मोटर व्हैकिल एक्ट के अनुसार हर छह महीने पर प्रदूषण जांच कराना अनिवार्य है. वाहनों के प्रदूषण जांच नहीं कराने पर एक हजार रुपये जुर्माना का प्रावधान भी एक्ट में किया गया है.बावजूद इसके जांच की पूरी व्यवस्था ही यहां लचर दिखती है.

प्रदूषण जांच के नाम पर खानापूर्ति

पूरे जिले में बाइक से लेकर बड़े वाहनों तक की संख्या लाखों में है.जबकि प्रदूषण जांच के दावे कलई खोलने के लिए काफी है. इन प्रदूषण केंद्रों पर नाम मात्र के ही वाहन जांच के लिए पहुंचते हैं.जिससे जांच केंद्र शो पीस ही साबित हो रहे हैं.हद तो यह कि जिले में प्रदूषण की जांच के लिए कभी भी बड़ा अभियान नहीं चला और ना ही वाहन चालकों पर कार्रवाई हुई है.

डीजल वाहनों से फैलता है अधिक प्रदूषण

विशेषज्ञों की मानें तो पेट्रोल वाहनों की अपेक्षा डीजल वाहनों से अधिक प्रदूषण फैलता है. क्योंकि इन वाहनों से निकलने वाले धुएं में कार्बन मोनो आक्सइड व हाइड्रो कार्बन की मात्रा अधिक होती है. यह कार्बन सांस के सहारे लोगों के फेफड़ों में जाता है तथा आंखों में जलन पैदा करता है

प्रत्येक वाहन के लिए अलग शुल्क निर्धारित है

विभागीय स्तर पर वाहनों के प्रदूषण जांच के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित है सबसे कम शुल्क दोपहिया वाहनों की जांच के लिए निर्धारित किया गया है.इसी प्रकार तीन पहिया, चारपहिया, तथा मध्यम मोटर यान तथा भारी मोटर यान के लिए भी शुल्क निर्धारित लेकिन जांच की प्रक्रिया नगण्य है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AWADHESH KUMAR

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By AWADHESH KUMAR

AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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