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यूरिया की तस्करी जोरों पर सीमा पार जा रही है नेपाल

Updated at : 04 Sep 2020 8:25 AM (IST)
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यूरिया की तस्करी जोरों पर सीमा पार जा रही है नेपाल

गलगलिया: भारत-नेपाल सीमा से लेकर नेपाल के करीब 50 किमी दूर तक गांव के किसानों की अधिकांश खेती भारतीय खाद पर निर्भर है. नेपाल में बिहार के मुकाबले यूरिया खाद के दाम में काफी अंतर है. जो यूरिया बिहार में 266 रुपये प्रति बोरी मिलती है, वहीं नेपाल पहुंचने पर 1000 रुपये हो जाती है.

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गलगलिया: भारत-नेपाल सीमा से लेकर नेपाल के करीब 50 किमी दूर तक गांव के किसानों की अधिकांश खेती भारतीय खाद पर निर्भर है. नेपाल में बिहार के मुकाबले यूरिया खाद के दाम में काफी अंतर है. जो यूरिया बिहार में 266 रुपये प्रति बोरी मिलती है, वहीं नेपाल पहुंचने पर 1000 रुपये हो जाती है. यही कारण है कि सालोंभर यूरिया की तस्करी चरम पर रहती है. तस्कर व दुकानदार तो मालामाल हो रहे, लेकिन समय से खाद न मिलने पर भारतीय किसानों की खेती चौपट हो रही है.

तस्करी कर ले जाते हैं यूरिया

यहां बता दें कि भारत-नेपाल सीमा पर स्थित प्रखंडों में सबसे अधिक खाद की दुकान है. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि खाद की अधिकांश सेल इंडो-नेपाल सीमा पर स्थित खाद दुकानदारों की सबसे अधिक है. भारत में यूरिया के लिए किसान भले परेशान रहे, लेकिन पड़ोसी देश नेपाल में हमेशा भारतीय यूरिया देखे जा सकते हैं. छोटे-छोटे चौराहों पर दुकानदार खुले में भारतीय खाद की बिक्री करते हैं. तस्कर इतने चालाक होते हैं कि सुरक्षा एजेंसियों के लाख प्रयास के बाद भी पकड़ में नहीं आते. कभी-कभार हाथ लगते भी हैं तो कैरियर. मुख्य तस्कर पकड़ में न आने से अंकुश नहीं लग पा रहा है. तस्करी के खेल में भारतीय किसान पिस जाते हैं. कई बार इंडो-नेपाल बार्डर पर किसानों को ही तस्कर समझ पकड़ लिया जाता है. हालांकि बाद में सबूत आदि पेश करने पर उन्हें छोड़ दिया जाता है. लेकिन तस्करों की पकड़ इतनी मजबूत है कि एंजेंसी और पुलिस की गिरफ्त में नहीं आते. बताया जाता है कि नेपाल में प्रति बोरा यूरिया का दाम एक हजार रुपये के करीब है. जिसका भारतीय मूल्य 700 रुपये से अधिक है.

ऐसे होती है तस्करी

पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए तस्करों ने ट्रैक्टर, पिकअप वेन के अलावे साइिकल सवार को लगाया है. दिन भर खाद लादकर सीमाई क्षेत्र के गांव में इकट्ठा करते हैं. समय देखते ही नेपाल पार कर देते हैं. इससे चाहकर भी यह पकड़ में नहीं आते.

यह रास्ता है मुफीद

सीमावर्ती क्षेत्र के दिघलबैंक प्रखंड के गंधर्वडांगा, डूबाटोली, मोहमारी, कुतुबाभिट्ठा, सिंघीमारी, फुटानीगंज, लोहागाडा, टेढ़गाछ प्रखंड के फुलवरिया, फतेहपुर, ठाकुरगंज प्रखंड के कादोगांव, सूढ़ीभिट्ठा, लगड़ाडूबा, पाठामरी, सुखानी आदि गांव के अगल-बगल व पगडंडियों के रास्ते नेपाल भेजते हैं. वहीं सुरक्षा एजेंसी की मानें तो खाद तस्करी की सूचना मिलने पर कार्रवाई की जाती है. यहां बता दें कि दो अगस्त की रात को दिघलबैंक प्रखंड के मोहामारी कंपनी मुख्यालय के एसएसबी जवानों ने 56 बोरी यूरिया के साथ दो तस्करों लुखी राम किस्कु व एनुश किस्कु को गिरफ्तार किया था. आठ अगस्त को बंगाल से लाई गई यूरिया की एक बड़ी खेप दिघलबैंक थाना क्षेत्र में पुलिस ने बरामद की थी. एक मिनी ट्रक व पिकअप वैन समेत 240 बोरी नीम कोटेड यूरिया जब्त की गई थी.

posted by ashish jha

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