अर्राबाड़ी पशु चिकित्सा महाविद्यालय द्वारा गाईनबस्ती में शिविर: 271 पशुओं की हुई मुफ्त जांच

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शिविर में मौजूद चिकित्सक व पशुपालक | Prabhat Khabar Network

शिविर में मौजूद चिकित्सक व पशुपालक | Prabhat Khabar Network

बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, अर्राबाड़ी ने किशनगंज जिले में एक जनहितैषी पहल करते हुए '109वां किसान संवाद सह निःशुल्क पशु चिकित्सा शिविर' का आयोजन किया. इस शिविर में 271 मवेशियों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें मुफ्त दवाएं और वैज्ञानिक पशुपालन की जानकारी दी गई.

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किशनगंज जिले के पोठिया प्रखंड स्थित बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, अर्राबाड़ी द्वारा एक बड़ी जनहितैषी पहल की गई है. महाविद्यालय प्रबंधन की ओर से शुक्रवार को रायपुर पंचायत के गाईनबस्ती केसोझारा गांव में '109वां किसान संवाद सह निःशुल्क पशु चिकित्सा शिविर' का भव्य आयोजन किया गया. इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों को उनके घर पर ही उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना और वैज्ञानिक पशुपालन के प्रति जागरूक करना था.

पशुपालकों के द्वार पर पहुंची चिकित्सा टीम: डॉ. सुचिता कुमारी

कार्यक्रम की मुख्य आयोजिका सह महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक (असिस्टेंट प्रोफेसर) डॉ. सुचिता कुमारी ने बताया कि इस वृहद् शिविर का आयोजन महाविद्यालय के अधिष्ठाता (डीन) डॉ. चंद्रहास के कुशल दिशा-निर्देशन में किया गया है.

ग्रामीण अंचलों में समय पर उचित चिकित्सकीय परामर्श न मिलने के कारण मवेशी कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं. इसी समस्या के निराकरण के लिए वैज्ञानिकों की टीम सीधे गांवों में जाकर पशुपालकों की समस्याओं को सुन रही है और मौके पर ही इलाज सुनिश्चित कर रही है.

271 पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण, निःशुल्क मिलीं जीवन रक्षक दवाइयां

शिविर के दौरान पशुओं के स्वास्थ्य की जांच के लिए आधुनिक मानकों का पालन किया गया:

  • जांच का दायरा: शिविर में क्षेत्र के कुल 72 पशुपालकों ने पंजीकरण कराया, जिनके 271 छोटे-बड़े दुधारू व अन्य मवेशियों का गहन स्वास्थ्य परीक्षण किया गया.
  • प्रमुख बीमारियां: पशुओं में मुख्य रूप से पेट के कीड़े (कृमि की समस्या), बांझपन व अंतःप्रजनन की जटिलताएं तथा दूध उत्पादन में अचानक आ रही कमी से संबंधित बीमारियों की जांच की गई.
  • मुफ्त वितरण: परीक्षण के बाद डॉक्टरों की टीम ने पशुपालकों को उचित चिकित्सकीय परामर्श दिया. साथ ही विभिन्न मौसमी बीमारियों के निदान से संबंधित दवाइयां, मल्टी-विटामिन, आवश्यक खनिज तत्व (मिनरल मिक्सचर) और कृमिनाशक (डीवॉर्मिंग) दवाओं का पूरी तरह निःशुल्क वितरण किया गया.

वैज्ञानिकों ने सिखाए आधुनिक पशुपालन के गुर

कार्यक्रम के सफल समन्वयक डॉ. राजेश ने बताया कि चिकित्सा शिविर के समानांतर आयोजित 'किसान संवाद' सत्र में पशुपालकों को वैज्ञानिक पद्धतियों की विस्तृत जानकारी दी गई.

विशेषज्ञों ने किसानों को पशुओं में होने वाली विभिन्न त्वचा संबंधी संक्रामक बीमारियों (जैसे लम्पी स्किन डिजीज), समय पर नियमित टीकाकरण (वैक्सीनेशन), संतुलित हरा व सूखा पोषण, रोगों की रोकथाम के घरेलू उपाय तथा समय-समय पर कृमिनाशन कराने के वैज्ञानिक फायदों के बारे में जागरूक किया. इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों को अर्राबाड़ी स्थित पशुपालन महाविद्यालय के मुख्य परिसर में उपलब्ध अत्याधुनिक एम्बुलेंस और इन-पेशेंट चिकित्सा सुविधाओं के बारे में भी विस्तार से बताया गया.

किसानों ने जताया आभार:

इस किसान संवाद कार्यक्रम में केसोझारा और आस-पास के गांवों के पशुपालकों ने बेहद उत्साहपूर्वक भाग लिया. ग्रामीणों ने घर बैठे मवेशियों का मुफ्त इलाज और मूल्यवान वैज्ञानिक जानकारियां उपलब्ध कराने के लिए महाविद्यालय प्रशासन और उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों के प्रति सामूहिक रूप से आभार व्यक्त किया.


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