किशनगंज.ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आयोजित सरस मेला में, सात सौ किलो महानंदा लीफ चायपत्ती की बिक्री हुई. 12 दिसंबर से 4 जनवरी तक पटना गांधी मैदान में आयोजित सरस मेला में, किशनगंज जिले की जीविका दीदियों के द्वारा तैयार चायपत्ती महानंदा लीफ को, लोगों ने काफी पसंद किया. लगभग दो लाख रुपये के चायपत्ती बिक्री का कारोबार हुआ. सरस मेला के समाप्ति के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीण विकास विभाग मंत्री श्रवण कुमार ने महानंदा लीफ चाय के बढ़ते कारोबार को लेकर, प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया. जीविका किशनगंज की डीपीएम अनुराधा चंद्रा ने बताया कि जीविका दीदियों द्वारा तैयार महानंदा लीफ चायपत्ती तेजी से अपनी पहचान बना रही है. सरस मेला में हुई इसकी बिक्री, यह बता रहा है कि लोगों को किशनगंज की चाय पसंद आ रही है. उन्होंने बताया कि आने वाले समय में टी बोर्ड के माध्यम से एवं जीविका के ग्रामीण बाजार, हाट इत्यादि जगहों पर महानंदा चायपत्ती बिक्री की जाएगी. जीविका डीपीएम ने बताया कि किशनगंज जिला में जीविका दीदियों द्वारा तैयार उत्पाद की बिक्री और ब्रांडिंग की दिशा में काम किया जा रहा. जीविका दीदियों को स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. जीविका दीदियों द्वारा तैयार उत्पादों को विभिन्न माध्यमों के जरिए, बिक्री बढ़ाने के लिए, कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है. जीविका संपोषित महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लि. द्वारा संचालित टी प्रोसेसिंग एंड पैकेजिंग इकाई, केचकेचीपाड़ा, पोठिया किशनगंज में महानंदा लीफ चाय तैयार की जा रही है. किशनगंज जिला में चाय पत्ता की खेती और पत्ता तोड़ने के कार्य से जुड़ी किसान जीविका दीदियों द्वारा महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लि. का संचालन किया जा रहा है. महानंदा एफपीसी से जुड़ी, जिला की जीविका दीदियाँ, टी फैक्ट्री का संचालन कर रही हैं. इस कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की जीविका दीदियां ही टी फैक्ट्री का संचालित कर रही हैं. महानंदा लीफ, चाय पत्ता की खेती करने वाली किशनगंज की जीविका दीदियों के लिए आर्थिक स्वावलंबन का आधार बन रहा है. सरस मेला में किशनगंज सदर प्रखंड के पानीसाल की पांच स्वयं सहायता समूह की लगभग चालीस जीविका दीदियों द्वारा ओखली में तैयार मसाला, की भी काफी बिक्री हुई. जीविका दीदियों द्वारा हल्दी, जीरा, धनिया, मिर्च इत्यादि मसालों को ओखली में तैयार कर उसका पैकेजिंग कर, बिक्री की जाती है. मेला में लगभग डेढ़ लाख रुपये के मसाला की बिक्री हुई. स्थानीय स्तर पर मसालों की खेती करने वाली जीविका दीदियों से मसालों की खरीद कर ओखली में मसाला तैयार किया जाता है. इस कार्य में शामिल जीविका दीदियों को महीने में औसतन बीस हजार रुपये की आमदनी हो जाती है. स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर शुरू की गई जीविका दीदियों की यह पहल, उद्यम का स्वरूप ले चुकी है। एक तरफ उनकी आमदनी बढ़ रही है वहीं, उनमें उद्यमिता का विकास हो रहा है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

