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गर्भवती महिलाओं का समय पर करायें टीडी वैक्सीनेशन

Updated at : 23 Apr 2025 9:14 PM (IST)
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गर्भवती महिलाओं का समय पर करायें टीडी वैक्सीनेशन

शरीर की प्रतिरोधी क्षमता कम होने के कारण कई प्रकार के संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है.

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-टेटनस, डिप्थेरिया, परट्यूटिस रोगों से होता है बचाव

-मातृ—शिशु मृत्यु को कम करने में टीकाकरण महत्वपूर्ण

किशनगंज गर्भवती व शिशु स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जिला में ग्रामीण स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस पर जिले के चिन्हित सत्र स्थलों पर गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण के चिन्हित करते हुए उनका आवश्यक टीकाकरण किया जा रहा है. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र कुमार स्थल निरिक्षण करते हुए बताया की टीकाकरण संक्रामक बीमारियों से बचाता है. गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए काफी कारगर है. गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में तेजी से बदलाव होते हैं. इस दौरान रोगी प्रतिरोधी क्षमता पर असर पड़ता है. शरीर की प्रतिरोधी क्षमता कम होने के कारण कई प्रकार के संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है. टीकाकरण संक्रामक रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है. गर्भवती महिलाओं का समय पर आवश्यक टीकाकरण जच्चा—बच्चा दोनों को स्वस्थ्य रखता है. प्रसव पूर्व जांच के दौरान गर्भवती महिलाओं को टिटनेस, डिप्थेरिया और परट्यूटिस से बचाव के लिए आवश्यक टीकाकरण किया जाता है.

टीडी वैक्सीन का टीका गर्भवती के लिए महत्वपूर्ण

सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने बताया कि सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल के मुताबिक गर्भावस्था में टिटनेस, डिप्थेरिया और परट्यूटिस का टीकाकरण जरूरी है. इससे बचाव के लिए टीडी वैक्सीन दिया जाता है. टीडी वैक्सीन इन सभी रोगों से बचाव में कारगर है. चूंकि टिटनेस संक्रमण नवजात शिशुओं के मृत्यु का एक बड़ा कारण है. इस लिए गर्भावस्था के दौरान ही टिटनेस टाक्साइड के दो टीका लगाये जाते हैं. दोनों टीका लगभग एक माह के अतराल पर दिया जाता है. वहीं काली खांसी से बचाव के लिए गर्भावस्था के 27वें सप्ताह से 36 सप्ताह के बीच टीकाकरण होता है. नवजात शिशु के लिए काली खांसी जोखिम भरा होता है.

गर्भवती का समय पर टीकाकरण कराया जाना जरूरी

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र कुमार ने बताया कि गर्भवती का समय पर टीकाकरण कराया जाना आवश्यक है और इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं की जानी चाहिए. गर्भवती के टीकाकरण से शिशु की रोग प्रतिरोधी क्षमता भी मजबूत होती है. टेटनस व डिप्थेरिया दोनों ही संक्रामक रोग है. उच्च रक्तचाप, तंत्रिका तंत्र का प्रभावित होना, मांसपेशियों में ऐंठन, गर्दन व जबड़े में अकड़न व पीठ का आकार धनुषाकार होना इसके प्रमुख लक्षण हैं. डिप्थेरिया संक्रमण से रोगी को सांस लेने में तकलीफ होती है तथा गर्दन में सूजन, बुखार व खांसी रहता है. इसके अलावा गर्भवती का फ्लू, हेपेटाइटिस ए और बी का भी टीकाकरण कराय जाना चाहिए.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AWADHESH KUMAR

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