पशुपालन है हमारा आय का मुख्य श्रोत, खुले डेयरी उद्योग
Published by :AWADHESH KUMAR
Published at :08 May 2025 8:56 PM (IST)
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महिला संवाद कार्यक्रम में महिलाएं जिले में डेयरी उद्योग के विकास को लेकर अपनी आकांक्षा और सुझाव व्यक्त कर रही हैं
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महिला संवाद : परिवहन सुविधा व योजनाओं पर महिलाओं ने रखी बात
किशनगंज.
महिला संवाद कार्यक्रम में महिलाएं जिले में डेयरी उद्योग के विकास को लेकर अपनी आकांक्षा और सुझाव व्यक्त कर रही हैं. जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड की डाकपोखर पंचायत की सुरमी देवी, महिला संवाद के दौरान, दुग्ध संग्रहण केंद्र बनाने की बात कही. उन्होंने कहा कि टेढ़ागाछ प्रखंड में अधिकांश लोगों के आय का साधन, कृषि और पशुपालन कार्य है. ऐसे में डेयरी उद्योग के विकास से पशुपालकों को संगठित रूप से आमदनी का जरिया प्राप्त होगा. स्थानीय बाजार में दूध की बिक्री और खपत में अनिश्चिता के कारण उनकी आमदनी प्रभावित होती है. डेयरी उद्योग के विकास से संस्थागत रूप से उन्हें निश्चित आमदनी की ओर बढ़ने में सहूलियत होगी. वहीं, पोठिया प्रखंड के कुसियारी पंचायत की कश्मीरा बेगम, महिला संवाद कार्यक्रम में सरकार की योजना की नियमित रूप से प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर अपनी बात कही. उन्होंने कहा कि इससे हमें सरकार की योजना की पूरी जानकारी मिल सकेगी. हमारी शिकायत, सुझाव को सुने जाने की जरूरत है. जिससे ससमय उसका निराकरण हो सकेगा. उन्होंने महिला संवाद कार्यक्रम में सरकारी की योजना की जानकारी प्राप्त कर इसकी उपयोगिता को सराहा. उन्होंने कहा कि वीडियो फिल्म के माध्यम से उन्हें योजना से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई. सरकार की योजना से लाभान्वित महिलाओं का अनुभव सुन, खुद उसका लाभ लेने की प्रेरणा मिली है. बगलबाड़ी पंचायत की नूरजमी बेगम, कोचाधामन में बस स्टैंड बनाने की आकांक्षा व्यक्त की. उन्होंने कहा कि किशनगंज एवं अन्य शहर से आने – जाने के लिए सरकारी बस सेवा की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए. ताकि इस मार्ग के यात्रियों को सुविधा हो सके. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में रेल मार्ग की कमी के कारण लोगों की निर्भरता बस, ऑटो इत्यादि पर ज्यादा है. ऐसे में इस क्षेत्र में विकास की संभावना और आवश्यकता दोनों है. महिला संवाद में महिलाएं बेबाकी से अपनी बात रख रही हैं. यह कार्यक्रम उनकी जिज्ञासा, सुझाव, आकांक्षा व्यक्त करने का माध्यम बन रहा है. महिला संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं की स्थानीय, नीतिगत आकांक्षा को मंच प्रदान करना, उसे दर्ज करना है. आगे की नीतिगत- योजनागत बदलाव हेतु सरकार के विभिन्न स्तरों पर उसे प्रेषित करना है. साथ महिलाओं के लिए चलाए जा रहे सरकार की विभिन्न योजना से उन्हें अवगत भी कराना है. जब गांव-टोलों से महिलाओं के विचार-मंतव्य सुने जाएंगे, उस दिशा में सकारात्मक प्रयास किये जाएंगे. तभी महिलाओं के जीवन में, बदलाव की दिशा में सार्थक सफलता मिलेगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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