बिहार के किशनगंज में दो बांग्लादेशी गिरफ्तार, नेपाल के रास्ते बांग्लादेश से पहुंचे भारत
Published by : Ashish Jha Updated At : 03 Aug 2025 11:53 AM
Bihar News: 41वीं वाहिनी की बार्डर इंटरैक्शन टीम ने सतर्कता दिखाते हुए उन्हें पकड़ लिया है. दोनों संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को चिकित्सीय परीक्षण एवं दस्तावेजी कार्यवाही के उपरांत आगे की वैधानिक कार्यवाही हेतु थाना खोरीबाड़ी को सुपुर्द करने की तैयारी की जा है.
Bihar News: किशनगंज. भारत-नेपाल सीमा पर किशनगंज से सटे पश्चिम बंगाल में सी कंपनी पानी टंकी 41वीं वाहिनी एसएसबी बार्डर इंटरैक्शन टीम ने लगभग डेढ़ बजे दिन में दो बांग्लादेशी नागरिकों को पुराने पुल पानी टंकी पर उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वे नेपाल से भारत में अवैध रूप से सीमा पार कर रहा था. यह कार्रवाई बार्डर पीलर संख्या 90/1 के पास लगभग दो सौ मीटर भारतीय सीमा के भीतर की गई.
पेशे से एक पिकअप ड्राइवर
पकड़ाए व्यक्तियों में नूर होसैन खोंडोकर पिता जाफर अहमद खोंडोकर ग्राम बौरपथोर, परशुराम पौरसभा परशुराम फेनी, बांग्लादेश और ओमर फारूक अरमान पिता टिपू खान कालिमारा, वार्ड संख्या 9, मदारीपुर सदर, मदरा 7900, बांग्लादेश शामिल है. संदिग्ध बांग्लादेशियों के पास से पांच मोबाइल फोन दो सिम कार्ड , नेपाली मुद्रा 17 सौ रुपये, बांग्लादेशी एक विकलांगता पहचान पत्र एवं एक बांग्लादेशी पहचान पत्र जब्त किया गया. पूछताछ में गिरफ्तार व्यक्ति नूर होसैन खोंडोकर जो पेशे से एक पिकअप ड्राइवर है.
सिलहट-त्रिपुरा मार्ग से पहुंचा बिहार
बताया जाता है कि बांग्लादेश के सिलहट-त्रिपुरा मार्ग से एक बांग्लादेशी एजेंट सोहाग की सहायता से अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था और उसके साथ ट्रेन से आठ महीने पहले नेपाल गया था. एजेंट सोहाग ने उसे रोमानिया भेजने का वादा किया और इसके लिए बारह लाख रुपया का मांग किया था. लगभग तीन महीने बाद एजेंट वापस बांग्लादेश चला गया और नूर होसैन खोंडोकर का पासपोर्ट भी अपने साथ ले गया, जिसके कारण वह नेपाल में ही फंसा रह गया.
हवाई मार्ग से काठमांडू पहुंचा फारूक
दूसरे गिरफ्तार व्यक्ति ओमर फारूक अरमान ने बीते आठ जनवरी को ढाका से काठमांडू हवाई मार्ग से यात्रा किया था, जो बांग्लादेशी एजेंट निसारुद्दीन की सहायता से हुआ. एजेंट ने उसे क्रोएशिया और फिर फ्रांस भेजने का वादा किया और इसके लिए बीस लाख रुपये लिए. अरमान ने काठमांडू के होटल बांग्ला में निवास किया. उसका नेपाल वीज़ा केवल एक महीने के लिए वैध था. वीज़ा की अवधि समाप्त होने के बाद उसकी मुलाकात नूर होसैन खोंडोकर से हुई.
वीजा खत्म होने के बाद नेपाल में फंसे
नेपाल में ही एक अन्य बांग्लादेशी एजेंट हसन ने उन्हें भारत के एजेंट फोनी राय का नंबर दिया और बताया कि वह उन्हें नीलफामारी (बांग्लादेश) होते हुए घर पहुंचा देगा. दोनों ने फोनी राय से संपर्क किया. जिसने उसे काकरविट्टा बुलाया और वहीं पर पच्चीस हजार नेपाली रुपये लिए. एजेंट ने उन्हें बताया कि वह इस धन को भारतीय मुद्रा में बदलने के बाद वापस आएगा। लेकिन एक घंटे से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी एजेंट नहीं लौटा. जिससे भ्रमित होकर दोनों ने ई रिक्शा कर पानीटंकी (बंगाल) का रुख किया.
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By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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