जांच परीक्षा से इनकार

Published at :08 Jun 2016 2:19 AM (IST)
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जांच परीक्षा से इनकार

फर्जीवाड़ा. डिप्रेशन की बात कह युवक ने िकया कार्यपालक सहायक पद पर नियुक्ति में गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आने पर मेधा सूची में नंबर वन रैंक प्राप्त करने वाला अभ्यर्थी मंगलवार को जिला पदाधिकारी पंकज दीक्षित के समक्ष प्रस्तुत हुआ़ किशनगंज : कार्यपालक सहायक पद पर नियुक्ति में गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आने […]

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फर्जीवाड़ा. डिप्रेशन की बात कह युवक ने िकया

कार्यपालक सहायक पद पर नियुक्ति में गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आने पर मेधा सूची में नंबर वन रैंक प्राप्त करने वाला अभ्यर्थी मंगलवार को जिला पदाधिकारी पंकज दीक्षित के समक्ष प्रस्तुत हुआ़
किशनगंज : कार्यपालक सहायक पद पर नियुक्ति में गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आने पर मेधा सूची में नंबर वन रैंक प्राप्त करने वाला अभ्यर्थी मंगलवार को जिला पदाधिकारी पंकज दीक्षित के समक्ष प्रस्तुत हुआ़ डीएम ने उसे पुन: कंप्यूटर टाइपिंग का साक्षात्कार देने को कहा तो वह डिप्रेशन का शिकार हो जाने की बात कह कर कुछ समय मांगा़ डीएम श्री दीक्षित ने उसे चार दिन का समय देते हुए चौथे दिन 11 जून को उपस्थित होने को कहा है़
कार्यपालक सहायक पद के मेधा सूची में नंबर वन रैंक के अभ्यर्थी कंप्यूटर ज्ञान में दक्ष नहीं है़ मेधा सूची में कंप्यूटर टाइपिंग में जितना अंक प्राप्त हुआ है वह अभ्यर्थी उसके लायक नहीं है़ मंगलवार को डीएम पंकज दीक्षित के समक्ष उपस्थित होने से पहले ट्रॉयल के तौर पर एक पदाधिकारी ने उसे हिंदी टाइप करने को कहा तो वह एक मिनट में आठ शब्द ही टाइप कर सका. जबकि मेधा सूची में उसे हिंदी टाइपिंग में एक मिनट में 29 शब्द का अंक दिया गया है़
वहीं जानकारी लेने के लिए पुन: पदाधिकारी ने उससे पूछा कि बिहार का उपमुख्यमंत्री कौन है तो उसका जवाब था लालू का बेटा. दूसरा सवाल उससे पूछा गया कि उत्तर बिहार का शोक किस नदी को कहा जाता है तो उसने बताया सिंधु नदी़ उक्त दोनों सवाल के जवाब से टॉपर अभ्यर्थी के संबंध में अंदाजा लगाया जा सकता है़ जबकि कार्यपालक सहायक नियुक्ति के लिए 50 अंकों का ऑब्जेक्टिव परीक्षा ओएमआर सीट पर लिया गया था़ 50 अंक में 42 अंक उसे प्राप्त हुआ है़
उठ रहे है सवाल
टॉपर छात्र ने डीएम के सामने टाइपिंग टेस्ट देने से बचते हुए डिप्रेशन के नाम पर लंबे समय की मांग कर रहा है़ कार्यपालक सहायक यानी कंप्यूटर ऑपरेटर ऐसे में सिर्फ लिखित परीक्षा के अंक के आधार पर कंप्यूटर दक्षता में शून्य अंक लाने वाले को आरक्षण रोस्टर को आधार बना कर कैसे मेधा सूची में शामिल किया गया है़ कार्यपालक सहायक नियुक्ति प्रक्रिया में वृहत पैमाने पर गड़बड़ी की गयी है़
पूरी प्रक्रिया को गहरायी से जांच की जाये तो कई पदाधिकारी व कर्मी इसके लपेटे में आ सकते है़ खास कर वे लोग जिनकी देख रेख में कंप्यूटर दक्षता परीक्षा ली गयी और जिला स्थापना प्रशाखा जिसने मेधा सूची बनायी है़ उसकी कार्यशैली पर प्रश्न उठना लाजिमी है़ यहां बता दे कि सफल अभ्यर्थियों में कतिपय अभ्यर्थी विभिन्न प्रशासनिक कार्यालयों में कार्यरत कर्मियों के रिश्तेदार हैं जिससे नियोजन प्रक्रिया की सुचिता संदेह के घेरे में दिखती है. उधर इस प्रकरण को दबाने के लिए के एक धड़ा सक्रिय है.
आखिर क्यों गड़बड़ी उजागर नहीं करना चाहती है प्रशासन
कार्यपालक सहायक नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है़ जिन अभ्यर्थियों का चयन किया गया है उसमें से जब टॉपर पर गंभीर सवाल उठ रहे है तो पुन: दक्षता परीक्षा कराने से प्रशासन क्यों हिचक रही है़
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