डीपीओ स्थापना को जिला लोक शिकायत निवारण में 16 मई को हाजिर होने का आदेश

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 May 2019 7:53 AM

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किशनगंज : बीते 30 अप्रैल को जिला लोक शिकायत निवारण केन्द्र किशनगंज में वर्ष 2014-15 से लंबित बकाये के भुगतान की गुहार लगाने ठाकुरगंज प्रखंड की तीन शिक्षिकाएं व एक शिक्षक पहुंचे. इन सभी ने सुनवाई के क्रम में अपने दावे के समर्थन में प्रखंड शिक्षा अधिकारी, ठाकुरगंज स्तर से जारी पत्र व अन्य संबंधित […]

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किशनगंज : बीते 30 अप्रैल को जिला लोक शिकायत निवारण केन्द्र किशनगंज में वर्ष 2014-15 से लंबित बकाये के भुगतान की गुहार लगाने ठाकुरगंज प्रखंड की तीन शिक्षिकाएं व एक शिक्षक पहुंचे. इन सभी ने सुनवाई के क्रम में अपने दावे के समर्थन में प्रखंड शिक्षा अधिकारी, ठाकुरगंज स्तर से जारी पत्र व अन्य संबंधित दस्तावेज उपस्थापित किया. डीपीओ (स्थापना) किशनगंज का पक्ष रखने के लिए एनामुल हक, लिपिक उपस्थित थे. उन्होंने बताया कि जिला कार्यालय स्तर से भुगतान तभी होता है जब प्रखंड शिक्षा अधिकारी स्तर से विपत्र उपलब्ध कराया जाता है.

लिपिक के इस बयान को सुनते ही परिवादियों ने अपने-अपने दावे के आलोक में प्रखंड कार्यालय स्तर से निर्गत विपत्र व पत्र की प्रति दिखाते हुए जिला शिक्षा कार्यालय के बयान का विरोध किया और कहा कि भुगतान करने के बजाय उन्हें फिर से प्रखंड और जिला कार्यालयों की दौड़ लगाने को विवश करने की साजिश रची जा रही है.
इस पर सुनवाई करने वाले अधिकारी ने जिला शिक्षा कार्यालय की कार्यप्रणाली पर बिफरते हुए आदेश दिया कि परिवादियों के दावे की राशि का नियमानुकूल भुगतान करते हुए अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाये.
अगली तिथि को उपस्थित हों डीपीओ (स्थापना)
जारी अंतरिम आदेश में कहा गया है कि लंबित बकाये का नियमानुकूल भुगतान करते हुए निम्नांकित सवालों के जवाब में सुस्पष्ट प्रतिवेदन के साथ डीपीओ (स्थापना) 16 मई को होने वाले सुनवाई में स्वयं उपस्थित रहेंगे. कौन कर्मी/पदाधिकारी दोषी हैं? मामला किस स्तर पर लंबित? कार्यवाहक सहायक ने परिवादियों के आवेदन प्राप्ति के बाद संचिका क्यों नहीं उपस्थापित किया ?
वेतनादि भुगतान को प्रतिनियुक्त हैं शिक्षक
नियोजित शिक्षकों के वेतनादि का ससमय भुगतान करने हेतु स्थापना ने अपने कार्यालय में एक नियोजित शिक्षक को ही प्रतिनियुक्त कर रखा है. हालांकि किसी भी शिक्षक का गैर-शैक्षणिक कार्य में प्रतिनियुक्ति पर निदेशालय स्तर से स्पष्ट रोक है.
ऐसे में वेतनादि का भुगतान करने हेतु शिक्षक का प्रतिनियुक्त रहने के बावजूद नियोजित शिक्षक/शिक्षिकाओं को उनके विभिन्न मदों के बकाये का भुगतान लंबे अरसे से नहीं किया जाना जिला शिक्षा कार्यालय की कार्यप्रणाली पर स्वतः ही अनेक प्रकार के सवाल खड़े कर रहा है, जिसका जवाब ढूंढ़ना अपरिहार्य हो गया है.
ऐसे में एक सवाल और भी खुद ब खुद उठता है कि क्या जिला प्रशासन इस प्रकार की खबरों पर खुद संज्ञान लेकर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए शीघ्र ही कोई सकारात्मक कदम उठा सकेगा.
परिवादियों के दावे के सत्यापन को स्थापना ने जारी किया आदेश
जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष हुए सुनवाई के बाद स्वयं की निंद्रा भंग करते हुए स्थापना ने परिवादियों के दावे का सत्यापन करने के लिए अपने ज्ञापांक 430 दिनांक 02 मई 2019 के मार्फ़त प्रखंड शिक्षा अधिकारी, ठाकुरगंज को पत्र जारी किया है.
शिक्षक संघ ने भी दिया था ज्ञापन
26 अप्रैल को अपना ज्ञापन स्थापना को देते हुए वर्षों से लंबित मेडिकल लीव, मातृत्व अवकाश व अन्य सभी प्रकार के बकाये का भुगतान करने की मांग की थी. बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ किशनगंज इकाई ने अपने इस ज्ञापन में यह भी बात रखी है कि एक लाख या इससे अधिक राशि का अंतर-वेतन उनके कार्यालय से यह कह कर रोक रखा गया है कि इतनी बड़ी राशि का भुगतान एक साथ संभव नहीं है. यदि इस संबंध में कोई स्पष्ट विभागीय आदेश हो तो उसे उपलब्ध करवाया जाये. यदि ऐसा कोई आदेश नहीं है तो संबंधित कर्मी व बिचौलिये को चिह्नित कर उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाये.
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