नेपाली गजराज के आतंक से दिघलबैंकवासियों में खौफ
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 Jan 2018 5:19 AM (IST)
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गजराज छीन रहे हैं किसानों का निवाला, गरीबों के आशियाने को पहुंचा रहे नुकसान दिघलबैंक : भारत-नेपाल सीमा से सटे करुवामनी पंचायत के सूरीभिट्ठा गांव में बीती रात करीब तीन बजे नेपाल से आये दो जंगली हाथियों ने जम कर उत्पात मचाया. कई एकड़ में लगे मकई, केला व गेंहू की फसल को रौंद दिया […]
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गजराज छीन रहे हैं किसानों का निवाला, गरीबों के आशियाने को पहुंचा रहे नुकसान
दिघलबैंक : भारत-नेपाल सीमा से सटे करुवामनी पंचायत के सूरीभिट्ठा गांव में बीती रात करीब तीन बजे नेपाल से आये दो जंगली हाथियों ने जम कर उत्पात मचाया. कई एकड़ में लगे मकई, केला व गेंहू की फसल को रौंद दिया और कई लोगों के कच्चा मकानों को गिरा दिया. रात्रि में घर के पीछे की दीवार गिरा तो घर में सो रही चम्पा देवी का नींद खुली बाहर झाक कर देखा तो हाथियों का आहट पा कर वह सचेत हो गई. हाथियों के आने की खबर सुनते ही ग्रामीण दूसरे लोगों को सुरक्षित करने के लिये मोबाइल पर सूचना देने लगे. मध्य रात्रि का अंधेरा व बढ़ती ठंड और घने कोहरे में लोग घर से बहार निकलना मुनासिब नहीं समझा.
घरों में ही सभी लोगों ने जमा होकर रातजगा किया. सुबह होने पर पता चला कि सूरीभिट्ठा गांव निवासी चम्पा देवी, छत्तर सिंह के घर की दीवार गिरा दिया, जबकि दिलीप कुमार के कई एक बीघा केले की फसल को भी नुकसान पहुंचाया. ग्रामीणों की मानें तो दो की संख्या में हाथी आये थे. लोगों द्वारा इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन को दी गयी. सीओ राकेश कुमार ने बताया की सूचना मिली थी,बाद में पता चला कि हाथियों का झुंड नेपाल की ओर चला गया है फिर भी सीमावर्ती क्षेत्र के लोग रात्रि में सतर्कता बरतें. वन विभाग को सूचना दे दी गयी है.
पूर्व में भी आ चुके है हाथी
पिछले दो वर्षों में जंगली हाथियों का झुंड दर्जनों वार सीमावर्ती क्षेत्र के सूरीभिट्ठा, सतमेदी,आमडंगी, पोठीमरी,डोरिया गांव में आ गए थे. जहाँ हाथी को भगाने के दौरान 14 वर्षीय करण लाल हरिजन की मौत हो गई थी.
जंगलों की कटाई के कारण भटक रहे हाथी : घने जंगलों और पहाड़ तथा नदियों के लिए अपनी विशेष पहचान रखने वाले नेपाल के तराई इलाके वालों जंगलों से अवैध रूप से वुक्षो की कटाई तथा लगातार काम हो रहे जंगल भी इस तरह से जंगली जानवरों को भटकने के लिए मजबूर करना एक बड़ा कारण है.
लोग दहशत में
पिछले दो वर्षों नेपाल के जंगलों से भटक कर आये तेंदुआ, जंगली बिल्ली, हाथियों का झुंड. इस वर्ष भी आये हाथियों के झुंड से लोग दहशत में है. सीमा से सटे गांव के लोग रात्रि को घर से बाहर निकलने में असहज महसूस करते है.उन्हें ये डर सता रहा है कि न जाने किधर से कौन सा जंगली जानवर निकल आये.
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