थोड़ी लापरवाही हुई, तो हो सकते हैं दुर्घटना का शिकार

दिघलबैंक : बाबूजी धीरे चलना जरा संभलना ….एक दौर था जब इस चर्चित व लोकप्रिय हिंदी फिल्मी गीत लोगों की जुबान पर थे. लोग अक्सर इसके बोल गुनगुनाया करते थे, लेकिन प्रयलंकारी बाढ़ के बाद दिघलबैंक प्रखंड की सड़कों पर गुजरने वालों के परिजन व उनके शुभ चिंतक यात्रा शुरु करने के पूर्व सावधानी बरतने […]
दिघलबैंक : बाबूजी धीरे चलना जरा संभलना ….एक दौर था जब इस चर्चित व लोकप्रिय हिंदी फिल्मी गीत लोगों की जुबान पर थे. लोग अक्सर इसके बोल गुनगुनाया करते थे, लेकिन प्रयलंकारी बाढ़ के बाद दिघलबैंक प्रखंड की सड़कों पर गुजरने वालों के परिजन व उनके शुभ चिंतक यात्रा शुरु करने के पूर्व सावधानी बरतने को ले हिदायत करने के लिए कहते है.बाबूजी धीरे चलना जरा संभलना बड़े जोखिम है. इस राह में प्रशासनिक एवं जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के शिकार इन सड़कों की हालत आज कल बदतर है इससे होकर आवागमन बंद कर खतरे का प्रतीक सड़क किनारे लगा दिए जाएं. ताकि नवागंतुक सतर्क हो जाए ताकि किसी हादसे की संभावना न रहे.
स्थानीय लोगों की विवशता ही है कि पूरी तरह जर्जर हो चुकी इन सड़कों से होकर उन्हें गुजरना पड़ता है. सभी रोड पर हर आठ से दस मीटर पर बने बड़े-बड़े गड्ढे भयंकर हादसे को दावत दे रहे हैं. जब हिचकोले खाते हुए चार पहिया वाहन गड्ढों से होकर गुजरते हैं. ईश्वर का नाम का ही सहारा होता है राहगीरों के पास.
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