नहीं मिली किताब, आ गयी मूल्यांकन परीक्षा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :15 Sep 2017 5:20 AM (IST)
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किशनगंज : जिले में शिक्षा में सुधार के दावों के बीच आरटीई की खुलकर धज्जियां उड़ रही है. आरटीई के अनुपालन को लेकर कवायद करने की बात जरूर होती है, लेकिन अधिनियम के वर्षों बाद भी इसका अनुपालन सुनिश्चित नहीं हो पाया है. आलम यह है कि जिले के सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों में नामांकित 3 […]
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किशनगंज : जिले में शिक्षा में सुधार के दावों के बीच आरटीई की खुलकर धज्जियां उड़ रही है. आरटीई के अनुपालन को लेकर कवायद करने की बात जरूर होती है, लेकिन अधिनियम के वर्षों बाद भी इसका अनुपालन सुनिश्चित नहीं हो पाया है.
आलम यह है कि जिले के सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों में नामांकित 3 लाख 25 हजार 905 बच्चे छह माह से बिना पाठ्य पुस्तक के शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात बेमानी साबित हो रही है. सरकारी विद्यालयों की लचर व्यवस्था के कारण अब लोग निजी विद्यालयों की ओर रुख कर रहे हैं. यद्यपि आधार पंजीयन, छात्रवृत्ति और पोशाक राशि के वितरण को लेकर तो भरपूर कवायद हो रही है, लेकिन बच्चों के लिए पठन-पाठन ही हाशिए पर है. बाढ़ के कारण बच्चों की पढ़ाई पूर्व में प्रभावित हो चुकी है. इसकी पूरी संभावना है कि इस बार भी बच्चे बिना पाठ्य पुस्तक ही अर्द्धवार्षिक मूल्यांकन में शामिल होंगे.
निजी विद्यालय की ओर रुख कर रहे अभिभावक
लगातार सरकारी विद्यालयों में शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर अभिभावक भी परेशान है. बच्चों के भविष्य की चिंता को लेकर वे अपने बच्चों का नामांकन निजी विद्यालयों में कराने को मजबूर हो रहे हैं. बताते चलें कि पाठ्य पुस्तक से वंचित बच्चों व उनके अभिभावकों ने जिलाधिकारी से भी इस संबंध में पहल करने की मांग कर चुके हैं. अभिभावक संजीव कुमार सिन्हा, भुवनेश्वर, गीता देवी, सइदुल हक, रिजवाल आदि ने बताया कि गत वर्ष भी समय से पाठ्य पुस्तक उपलब्ध नहीं होने से पढ़ाई प्रभावित हुई थी. इस वर्ष भी यही हाल है. बच्चे केवल विद्यालय जाकर उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं.
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