Kisan Samman: पगडंडी से पद्मश्री तक पहुंचीं किसान चाची, जानें कैसे चाची से किसान चाची बन गयीं राजकुमारी

Kisan Samman: किसान चाची आज देश की हजारों महिलाओं के लिए रोल मॉडल हैं. गरीब परिवार में जन्मीं राजकुमारी देवी की शादी 1974 में आनंदपुर गांव निवासी किसान परिवार के अवधेश कुमार चौधरी के साथ हुई थी.
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अचार बेचने व महिलाओं को जागरूक करने के लिए घर से बाहर कदम रखा
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40-50 किमी दूर तक साइकिल से सफर किया 2019 में मिला पद्मश्री अवार्ड
मुजफ्फरपुर. गांव की आम महिला पहले साइकिल चाची, फिर किसान चाची बनी. अपने हुनर और हौसले के बूते उसने खेतों की पगडंडियों से होते हुए पद्मश्री तक का सफर पूरा किया. जी हां, मुजफ्फरपुर के सरैया की रहने वाली किसान चाची पद्मश्री राजकुमारी देवी का सफर काफी संघर्ष भरा रहा है. किसान चाची आज देश की हजारों महिलाओं के लिए रोल मॉडल हैं. गरीब परिवार में जन्मीं राजकुमारी देवी की शादी 1974 में आनंदपुर गांव निवासी किसान परिवार के अवधेश कुमार चौधरी के साथ हुई थी.
राजकुमारी देवी ने जैसे ही ससुराल में कदम रखा उनके ससुरालवालों ने उन्हें पति के साथ घर से अलग कर दिया. बंटवारे के बाद मिली 2.5 एकड़ जमीन से उन्हें परिवार चलाना था, जो काफी मुश्किल था. तब राजकुमारी देवी ने घर में ना रहकर जमीन से पैसे कमाने का फैसला किया. उन्होंने खेतों में काम करना शुरू किया. पूसा कृषि विद्यालय से उन्नत कृषि की जानकारी ली और अपने खेतों में ओल और पपीता लगाया. खेतों में लगे ओल को उन्होंने सीधे बाजार में भेजने की जगह उसका आटा और आचार बनाया. अचार के बिजनेस से उन्हें आय होने लगी.
राजकुमारी देवी को गांव के लोग रिश्ते में पहले चाची कहकर बुलाते थे, लेकिन खेती शुरू की तो किसान चाची बन गयी. उन्होंने अपने घर पर ही महिलाओं को खेती से जोड़ने के लिए जागरूक किया और अचार बनाना सिखाया. धीरे-धीरे उनके बाकी फूड प्रोडक्ट भी बाजार में आ गये. कई पुरस्कार जीतने के बाद आसपास के लोग भी उनसे सलाह लेने आने लगे. किसान चाची ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सबल बनाने के लिए काफी प्रयास किया. वे गांव-गांव जाकर महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूह बनाने लगीं. उन्होंने महिलाओं को खेती, फूड प्रोसेसिंग और मूर्ति बनाने के तरीके सिखाये.
किसान चाची को 2003 में सबसे पहले लालू प्रसाद ने कृषि मेला के दौरान पुरस्कृत किया था. 2007 में किसान श्री का सम्मान मिला. इसके बाद 11 मार्च 2019 उनके जीवन का सबसे खास दिन बना, जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया.
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